मातृभाषा को नई पहचान देने की पहल: दुमका में “अपुर पाठशाला” की 34वीं इकाई का हुआ शुभारंभ

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 9 मई 2026 दुमका। दुमका जिले के रसिकपुर स्थित गौरी विहार मोहल्ले में बंगला भाषा और संस्कृति के संरक्षण को लेकर एक प्रेरणादायी पहल देखने को मिली। माताजी आश्रम के तत्वावधान में “अपुर पाठशाला” की 34वीं शाखा का उद्घाटन भव्य रूप से किया गया। कथामृत उत्सव के तीसरे दिन आयोजित इस कार्यक्रम ने साहित्य, संस्कृति और मातृभाषा प्रेम का अनूठा संदेश दिया। आयोजन गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की जयंती की पूर्व संध्या पर होने से माहौल और भी सांस्कृतिक हो उठा।कार्यक्रम का शुभारंभ शाम से पूर्व दीप प्रज्वलन, धूप अर्पण और फीता काटकर किया गया। उद्घाटन समारोह में सुनील कुमार दे, कमल कांती घोष, सुभ्रत कुमार सिंह, डॉ. एन. गोराई, दयामय माझी और दिवाकर महतो ने संयुक्त रूप से भाग लिया। इसके बाद सरस्वती वंदना और सांस्कृतिक गीतों की प्रस्तुति से उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया गया।माताजी आश्रम हाटा के सचिव राजकुमार साह ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि भाषा किसी समाज की आत्मा होती है और बंगला भाषा की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की बड़ी जरूरत है। वहीं आश्रम के निदेशक, कवि एवं “अपुर पाठशाला” के मुख्य संचालक सुनील कुमार देे ने कहा कि बच्चों को अपनी मातृभाषा सीखने में गर्व महसूस करना चाहिए। उन्होंने बताया कि भविष्य में झारखंड के विभिन्न जिलों में भी “अपुर पाठशाला” का विस्तार किया जाएगा।कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बंगला साहित्य, संस्कृति और शिक्षा पर अपने विचार रखे। दिवाकर महतो ने कहा कि माताजी आश्रम का यह अभियान भाषा संरक्षण की दिशा में सराहनीय और प्रेरणादायी प्रयास है। डॉ. डी.एन. गोराई, सुभाष चंद्र मंडल, दामोदर प्रसाद साह और दयामय माझी ने भी मातृभाषा आधारित शिक्षा को बच्चों के मानसिक और सांस्कृतिक विकास के लिए आवश्यक बताया।इस नई शाखा में उद्घाटन के दिन ही 26 बच्चों का नामांकन किया गया। विद्यार्थियों के बीच बंगला वर्णमाला की पुस्तकें वितरित की गईं। जानकारी दी गई कि प्रत्येक शनिवार और रविवार को नित्यगोपाल गोस्वामी, रेबा गोस्वामी, मेनका घोष, पवित्र गोराई, कृष्ण गोराई सहित अन्य शिक्षक बच्चों को बंगला भाषा की शिक्षा देंगे।कार्यक्रम में गौरी विहार और रसिकपुर क्षेत्र के गोपाल पंडित, परेशचंद्र गोराई, काजल लायक, तरी मंडल, दामोदर साह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे। आयोजन ने क्षेत्र में भाषा और सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा देने का कार्य किया।

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