बंगाली विषय सीमित करने की चर्चा से उठे सवाल, बांग्लाभाषी समाज ने जताई चिंता; शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा की उठी मांग

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 24 मई 2026 धनबाद। रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित कई प्रमुख कॉलेजों से बंगाली विषय को हटाकर उसे केवल धुर्वा कॉलेज तक सीमित किए जाने की चर्चा ने बांग्लाभाषी समाज में चिंता बढ़ा दी है। यदि यह सूचना सही साबित होती है, तो इसे झारखंड के हजारों विद्यार्थियों के शैक्षणिक अधिकारों और भाषाई पहचान से जुड़े गंभीर मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है। इस संबंध में झारखंड बांग्ला भाषी उन्नयन समिति ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इस प्रकार का निर्णय व्यापक प्रभाव डाल सकता है।समिति की कार्यकारी अध्यक्ष रीना कुमारी मंडल ने जारी प्रेस वक्तव्य में कहा कि झारखंड एक बहुभाषी और विविध सांस्कृतिक परंपराओं वाला राज्य है, जहां लंबे समय से बांग्लाभाषी समुदाय अपनी भाषा और सांस्कृतिक विरासत के साथ निवास करता आ रहा है। रांची, धनबाद, जामताड़ा, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जैसे जिलों में बड़ी संख्या में बांग्लाभाषी परिवार रहते हैं। ऐसे में उच्च शिक्षण संस्थानों में बंगाली विषय की उपलब्धता सीमित होना विद्यार्थियों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।समिति का कहना है कि भारतीय संविधान भाषाई और सांस्कृतिक विविधता की रक्षा को महत्व देता है। संविधान का अनुच्छेद 29 भाषाई समूहों को अपनी भाषा और संस्कृति की सुरक्षा का अधिकार देता है, वहीं अनुच्छेद 350ए मातृभाषा में शिक्षा की भावना को बढ़ावा देने की बात करता है। इसके साथ ही नई शिक्षा नीति 2020 तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग भी भारतीय भाषाओं के संरक्षण और विस्तार पर बल देते हैं।प्रेस विज्ञप्ति में यह भी सवाल उठाया गया कि यदि कई कॉलेजों में बंगाली विषय समाप्त कर दिया जाता है, तो दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए कहां जाएंगे। आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए एक ही संस्थान पर निर्भरता शिक्षा तक पहुंच को कठिन बना सकती है।झारखंड बांग्ला भाषी उन्नयन समिति ने रांची विश्वविद्यालय और राज्य सरकार से मांग की है कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों, भाषा विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों के साथ व्यापक चर्चा की जाए। समिति का कहना है कि सभी भाषाओं को समान अवसर और सम्मान देना ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक भावना है।

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