खेत बचाओ अभियान: पूरे जून माह चलेगा जागरूकता महाअभियान, किसानों तक पहुंचेंगी कृषि योजनाएं

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 4 जून 2026 जामताड़ा। किसानों को टिकाऊ खेती, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से झारखंड सरकार ने राज्यभर में एक माह तक चलने वाले “खेत बचाओ अभियान” को प्रभावी ढंग से संचालित करने का निर्देश दिया है। यह अभियान 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे राज्य में चलाया जाएगा। कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज द्वारा जारी निर्देश में सभी जिला कृषि पदाधिकारियों को अभियान के सफल संचालन के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि यह पहल भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय के आह्वान पर शुरू की गई है। अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने, रासायनिक उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करना है। इसके लिए जिला स्तर पर कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ समन्वय स्थापित कर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।अभियान के तहत हरित खाद के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही सरकारी कृषि प्रक्षेत्रों में किसानों के लिए प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें वैज्ञानिक खेती और संतुलित उर्वरक प्रयोग की जानकारी दी जाएगी। पात्र किसानों के बीच मिनीकिट एवं बीज वितरण के अलावा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), फसल बीमा योजना और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने पर भी विशेष जोर रहेगा।इसके अतिरिक्त किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराकर उनकी भूमि की उर्वरता और पोषक तत्वों की स्थिति की जानकारी दी जाएगी, जिससे वे आवश्यकतानुसार उर्वरकों का उपयोग कर सकें। विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी देने के लिए पंपलेट एवं प्रचार सामग्री का भी व्यापक वितरण किया जाएगा।कृषि निदेशालय ने सभी जिलों से प्रतिदिन अभियान की प्रगति रिपोर्ट भेजने को कहा है। रिपोर्ट में आयोजित प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों की संख्या, लाभान्वित किसानों की संख्या तथा कार्यक्रमों के प्रभाव का संक्षिप्त विवरण शामिल रहेगा। इससे अभियान की नियमित निगरानी और मूल्यांकन किया जा सकेगा।राज्य सरकार का मानना है कि इस अभियान के माध्यम से किसानों में सतत कृषि के प्रति जागरूकता बढ़ेगी तथा कृषि उत्पादन को अधिक लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकेगा।

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