न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 10 जून 2026 जामताड़ा। नाला प्रखंड की चकनयापाड़ा पंचायत में मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर एक गंभीर शिकायत सामने आई है। जीवनपुर गांव के निवासी बुधन मिर्धा और उनकी पत्नी बेबी देवी ने आरोप लगाया है कि उनके नाम का उपयोग कर विभिन्न योजनाओं में लाखों रुपये की निकासी कर ली गई, जबकि उन्होंने न तो कोई कार्य कराया और न ही किसी भुगतान की जानकारी उन्हें दी गई। मामले को लेकर दोनों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए उपायुक्त आलोक कुमार को लिखित आवेदन सौंपा है।शिकायत के अनुसार, पंचायत स्तर पर कुछ लोगों की मिलीभगत से उनके नाम पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और मनरेगा योजनाओं में कार्य पूर्ण दर्शाकर सरकारी राशि का भुगतान कर दिया गया। आवेदन में पंचायत की मुखिया, एक स्थानीय बिचौलिया तथा कुछ संबंधित कर्मियों पर संदेह व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।बुधन मिर्धा का कहना है कि उनके पास आवासीय मकान के अलावा कोई विशेष जमीन नहीं है। इसके बावजूद सरकारी अभिलेखों में उनके नाम पर भूमि विकास और अन्य कार्यों को पूरा दिखाया गया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें इन योजनाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और न ही उन्होंने किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं।आवेदन में जिन योजनाओं का उल्लेख किया गया है, उनमें बुधन मिर्धा के नाम पर भूमि समतलीकरण कार्य में ₹1,66,098 तथा मेड़बंदी योजना में ₹43,350 की निकासी दर्शाई गई है। वहीं उनकी पत्नी बेबी देवी के नाम पर भूमि समतलीकरण योजना में ₹2,50,920 और अबुआ आवास से संबंधित मजदूरी मद में ₹23,088 का भुगतान दर्ज है। इस प्रकार कुल ₹4,83,456 की राशि निकाले जाने का दावा किया गया है।पीड़ित दंपति के अनुसार, उन्हें पूरे मामले की जानकारी तब मिली जब जांच के सिलसिले में कुछ अधिकारी उनके घर पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि उनके नाम पर संचालित योजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है और भुगतान भी हो गया है। इसके बाद उन्होंने संबंधित अभिलेखों की जानकारी जुटाई, जिसमें कथित अनियमितताओं का पता चला।दंपति ने उपायुक्त से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने, जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग की जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। शिकायत सामने आने के बाद क्षेत्र में मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब लोगों की नजर प्रशासनिक जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई है।
बिना काम हुए लाखों की निकासी का दावा: मनरेगा रिकॉर्ड में दर्ज हुआ काम, लाभुक बोले– हमें कुछ पता ही नहीं
