लीज सीमा से बाहर खनन का आरोप, चन्द्रदीपा में ग्रामीणों का विरोध तेज

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 10 जून 2026 जामताड़ा। जामताड़ा प्रखंड की चन्द्रदीपा पंचायत में संचालित एक पत्थर खदान और क्रशर यूनिट को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने खनन कार्यों में अनियमितता और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।गांव के निवासी सहदेव हेंब्रम समेत कई ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित कंपनी द्वारा स्वीकृत लीज क्षेत्र के अतिरिक्त सरकारी अनावादी भूमि पर भी खनन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उनका दावा है कि मौजा चन्द्रदीपा के प्लॉट संख्या 1146 की लगभग 2 एकड़ 45 डिसमिल भूमि पर बिना वैध अनुमति के खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार खदान स्थल पर लगाए गए सूचना बोर्ड में इस प्लॉट का कहीं उल्लेख नहीं है।स्थानीय लोगों ने बताया कि कंपनी को जिन भूखंडों पर खनन की अनुमति मिली है, उनमें कुछ निर्धारित प्लॉट शामिल हैं और उनकी कुल रकबा 7 एकड़ 19 डिसमिल बताई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वास्तविक स्थिति इससे अलग दिखाई दे रही है और खनन का दायरा स्वीकृत क्षेत्र से आगे बढ़ चुका है।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि खदान से निकाली गई मिट्टी और अवशेष सामग्री आसपास की गोचर भूमि पर जमा की जा रही है। इसके अलावा क्रशर मशीनों से निकलने वाली धूल और बार-बार होने वाले ब्लास्टिंग कार्यों के कारण आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि कई बार विस्फोट के दौरान पत्थरों के छोटे-बड़े टुकड़े दूर तक जा गिरते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।लोगों के अनुसार खदान शहरडाल-लादना मुख्य मार्ग के बेहद करीब स्थित है। ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाही और खनन गतिविधियों के कारण सड़क सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि वर्तमान स्थिति पर्यावरण संरक्षण और जनसुरक्षा दोनों दृष्टिकोण से चिंताजनक है।ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में पूर्व में ग्रामसभा के माध्यम से जिला प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपी गई थी। बाद में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित विभागों को भी मामले से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।इधर, बढ़ते विरोध के बीच ग्रामीणों ने खदान और क्रशर संचालन की निष्पक्ष जांच कराने तथा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर खनन कार्य बंद कराने की मांग की है। वहीं उपायुक्त आलोक कुमार ने कहा है कि मामला संज्ञान में आया है और मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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