“हक की लड़ाई के लिए 25 जून को मैथन में महाजुटान: विस्थापितों ने दी डीवीसी गेट जाम की चेतावनी”

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 16 जून 2026 जामताड़ा। जामताड़ा जिले के विभिन्न विस्थापित गांवों के लोगों ने अपने अधिकारों और लंबित मांगों को लेकर 25 जून को डीवीसी मैथन परियोजना कार्यालय के समीप धरना-प्रदर्शन एवं गेट जाम आंदोलन करने की घोषणा की है। इस संबंध में दामोदर वैली वस्तुहारा संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष अकबर अंसारी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी, बीडीओ तथा संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की जानकारी दी।अकबर अंसारी ने कहा कि मैथन डैम निर्माण के दौरान सबसे अधिक प्रभावित और विस्थापित जामताड़ा जिले के लोग हुए, लेकिन दशकों बाद भी उन्हें अपेक्षित मुआवजा, रोजगार और मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डीवीसी विस्थापितों की जमीन और जल संसाधनों का उपयोग कर करोड़ों रुपये का राजस्व अर्जित कर रहा है, जबकि प्रभावित परिवार आज भी बिजली, पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।संघर्ष समिति ने मांग की है कि विस्थापित गांवों में सीएसआर मद से विकास कार्य कराए जाएं तथा स्थानीय युवाओं को डीवीसी और उसके आउटसोर्सिंग ठेकेदारों के माध्यम से रोजगार में प्राथमिकता दी जाए। समिति का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के समय स्थानीय लोगों को रोजगार देने का जो आश्वासन दिया गया था, उसका आज तक समुचित पालन नहीं हुआ।अकबर अंसारी ने बताया कि वर्ष 1978 के विस्थापित पैनल से हजारों लोगों के नाम कथित रूप से हटा दिए गए थे। ऐसे सभी छूटे हुए परिवारों के नाम नए पैनल में जोड़ने की मांग की जाएगी। इसके लिए प्रभावित लोगों से 25 जून को आधार कार्ड की छायाप्रति साथ लाने का आह्वान किया गया है। साथ ही सभी पात्र विस्थापितों को 15 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी उठाई जाएगी।समिति ने यह भी मांग की कि सुरक्षा व्यवस्था में स्थानीय विस्थापित युवकों को प्राथमिकता मिले। उनका कहना है कि डैम निर्माण काल में स्थानीय लोग ही सुरक्षा व्यवस्था संभालते थे और उस समय किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं होती थी। इसके अलावा मैथन जलाशय से जुड़े नाव संचालन और मत्स्य पालन जैसे पारंपरिक रोजगार को भी सुरक्षित रखने की मांग की गई।आंदोलन को सफल बनाने के लिए विभिन्न विस्थापित पंचायतों के मुखिया, पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीणों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है। समिति ने चेतावनी दी कि यदि विस्थापितों के अधिकारों और मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इस मौके पर मुकेश मिर्धा, आदिल अंसारी, अजीत तुरी, सोहेल अंसारी, मानिक समेत कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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