मंडप में सजी थी खुशियों की महफिल, बारात से पहले पहुंची प्रशासनिक टीम; नाबालिग की शादी रुकवाई

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 18 जून 2026 जामताड़ा। जिले में बाल विवाह रोकथाम को लेकर प्रशासन की सक्रियता एक बार फिर देखने को मिली। बुधवार शाम जामताड़ा के प्रसिद्ध मां चंचला मंदिर परिसर में होने जा रही एक शादी को प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद रोक दिया गया। जांच में सामने आया कि विवाह के लिए तैयार की जा रही लड़की नाबालिग थी। समय रहते कार्रवाई होने से एक बाल विवाह टल गया और लड़की के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।जानकारी के अनुसार, कर्माटांड़ थाना क्षेत्र की रहने वाली एक किशोरी की शादी मां चंचला मंदिर में संपन्न कराई जानी थी। विवाह की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। मंडप सज चुका था, दुल्हन तैयार थी और बारात के आने का इंतजार किया जा रहा था। इसी बीच किसी जागरूक व्यक्ति ने मामले की सूचना जामताड़ा के उपायुक्त को दे दी।सूचना मिलते ही उपायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद प्रभारी सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी, अंचल अधिकारी तथा पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया। अधिकारियों और पुलिस बल की टीम मंदिर परिसर पहुंची और शादी से संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू की।जांच के दौरान अधिकारियों ने लड़की के परिजनों से उसकी आयु प्रमाणित करने वाले दस्तावेज मांगे। हालांकि परिजन कोई ऐसा वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिससे यह साबित हो सके कि लड़की बालिग है। इसके बाद अधिकारियों ने परिजनों को बाल विवाह से होने वाले सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों की जानकारी दी और विवाह को तत्काल रोकने का निर्णय लिया।प्रशासनिक अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों को समझाया कि कम उम्र में विवाह करना कानूनन अपराध है और इससे लड़की के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। जागरूकता और समझाइश के बाद परिजन विवाह रोकने के लिए तैयार हो गए।इस संबंध में प्रभारी सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा जामताड़ा, मोहम्मद कयूम अंसारी ने बताया कि बाल विवाह की सूचना प्राप्त होते ही संबंधित अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर जांच की गई। जांच में लड़की की उम्र को लेकर संतोषजनक प्रमाण नहीं मिलने पर परिजनों को बाल विवाह निषेध कानून की जानकारी दी गई और समझा-बुझाकर शादी रुकवाई गई।प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई की स्थानीय लोगों ने सराहना की है। अधिकारियों का मानना है कि समाज और प्रशासन की संयुक्त जागरूकता से ही बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

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