प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से बालू कारोबार! जामताड़ा में आदेश बेअसर, सीमावर्ती घाटों पर माफियाओं का कब्जा

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 21 जून 2026 जामताड़ा। जिले में बालू खनन पर प्रशासन द्वारा लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद कई नदी घाटों पर अवैध गतिविधियां जारी रहने के आरोप सामने आ रहे हैं। एक ओर जिला प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण और न्यायिक निर्देशों का हवाला देते हुए बालू उठाव पर रोक लगा रखी है, वहीं दूसरी ओर कुछ घाटों पर खुलेआम खनन और भंडारण की खबरें प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं।नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) के आदेश तथा केंद्र सरकार की सस्टेनेबल सैंड माइनिंग गाइडलाइन के अनुपालन में जामताड़ा जिला प्रशासन ने 10 जून 2026 से 15 अक्टूबर 2026 तक जिले के सभी नदी बालूघाटों से बालू उठाव पर प्रतिबंध लागू किया है। इस संबंध में उपायुक्त आलोक कुमार ने संबंधित अधिकारियों को सख्त निगरानी रखने और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।इसके बावजूद नाला थाना क्षेत्र के पथरघाटा घाट में दुर्गा मंदिर के समीप बड़ी मात्रा में बालू का भंडारण किए जाने की चर्चा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां जमा बालू की खुलेआम बिक्री की जा रही है। वहीं बंखेत घाट पर भी बड़े पैमाने पर मशीनों की मदद से बालू निकाले जाने की शिकायतें मिल रही हैं। बताया जा रहा है कि हाईवा, डंपर और ट्रैक्टरों के माध्यम से बालू को बंगाल सीमा की ओर भेजा जा रहा है।बंखेत घाट की स्थिति को लेकर सबसे अधिक चिंता जताई जा रही है। यह क्षेत्र झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा हुआ है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सीमावर्ती इलाके का फायदा उठाकर कुछ लोग बंगाल की ओर से खनन करते हुए झारखंड क्षेत्र में प्रवेश कर बालू निकाल रहे हैं। इससे प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि प्रतिबंध लागू होने के बावजूद अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो पर्यावरणीय नुकसान के साथ-साथ राजस्व की भी क्षति होगी। लोगों का मानना है कि सरकारी निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित जांच अभियान चलाने की आवश्यकता है।इस पूरे मामले पर उपायुक्त आलोक कुमार ने कहा है कि अवैध बालू खनन और परिवहन की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा तथा दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक सख्ती धरातल पर दिखाई देती है या फिर अवैध कारोबार पहले की तरह चलता रहता है।

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