आत्मा के किसान गोष्ठी में वैज्ञानिक खेती, मृदा स्वास्थ्य और किसान क्रेडिट कार्ड योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी
न्यूज 61 लाइव संवाददाता 9 जुलाई 2026 कुंडहित। खरीफ सीजन में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और बदलते मौसम की परिस्थितियों के अनुरूप खेती के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गुरुवार की शाम कुंडहित प्रखंड के डुमरा गांव में आत्मा के तत्वावधान में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आत्मा के उप परियोजना निदेशक संजय कुमार सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि इस वर्ष अपेक्षाकृत कम वर्षापात की संभावना को देखते हुए किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती को भी अपनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की मिलेट मिशन योजना के तहत मोटे अनाज की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 3,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है, जिससे उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।उन्होंने किसानों को सलाह दी कि यदि क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा नहीं होती है तो ऊंची भूमि पर दलहन और तिलहन फसलों की खेती करना अधिक लाभदायक होगा। इसके साथ ही उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व, संतुलित उर्वरक के उपयोग तथा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना की जानकारी देते हुए किसानों से सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।गोष्ठी के दौरान किसानों के बीच हाइब्रिड स्ट्रेस टॉलरेंट वैरायटी ‘बायोसीड-799’ धान बीज का क्लस्टर के आधार पर वितरण किया गया। कुल 35 किसानों को बीज उपलब्ध कराया गया। बीज वितरण के बाद किसानों को हाइब्रिड धान की वैज्ञानिक खेती, बुआई की सही विधि, पौध संरक्षण, उर्वरक प्रबंधन और बेहतर उत्पादन तकनीकों की विस्तृत जानकारी भी दी गई।संजय कुमार सिंह ने कहा कि हाइब्रिड धान की किस्में कम लागत में अधिक उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करें तो कम संसाधनों में भी अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।कार्यक्रम में बीटीएम सुजीत सिंह, प्रभारी बीईओ मनोरंजन मिर्धा तथा एटीएम अमिर हेम्बरम ने भी किसानों को कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं, उन्नत खेती की तकनीकों और फसल प्रबंधन के संबंध में उपयोगी जानकारी दी। गोष्ठी में क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे और विशेषज्ञों से अपने कृषि संबंधी प्रश्नों का समाधान भी प्राप्त किया।
