न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 17 जुलाई 2026 जामताड़ा। जामताड़ा सदर अस्पताल में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हुई कथित अभद्रता एवं अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की घटना के विरोध में शुक्रवार को स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। झारखंड मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर डॉक्टरों ने सामूहिक कार्य बहिष्कार किया, जिसे चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का भी समर्थन मिला। हड़ताल के कारण अस्पताल की ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं, जबकि आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था सीमित स्तर पर संचालित होती रही।जानकारी के अनुसार, गुरुवार को इलाज के दौरान एक प्रसूता की मृत्यु के बाद उसके परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में जमकर हंगामा किया। इस दौरान अस्पताल के भीतर तोड़फोड़ की गई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के साथ चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप भी सामने आया। घटना के बाद अस्पताल का माहौल तनावपूर्ण हो गया।शुक्रवार को कार्य बहिष्कार कर रहे चिकित्सकों ने प्रशासन से दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और अस्पताल में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना है कि जब तक अस्पताल परिसर में सुरक्षित माहौल सुनिश्चित नहीं किया जाएगा और आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विक्की माझी ने कहा कि डॉक्टर मरीजों की सेवा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं, लेकिन हिंसा और भय के वातावरण में काम करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाए तथा अस्पताल में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जाए।नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक चौधरी ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों पर बढ़ते हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग दोहराई।इस बीच हड़ताल का असर मरीजों पर भी साफ दिखाई दिया। मोहनपुर क्षेत्र से प्रसव पीड़ा से पीड़ित नौ माह की गर्भवती महिला को एंबुलेंस से सदर अस्पताल लाया गया। परिजनों का आरोप है कि हड़ताल का हवाला देकर महिला को भर्ती नहीं किया गया और अन्य अस्पताल जाने की सलाह देकर वापस भेज दिया गया। महिला के पति और साथ आई सहिया ने बताया कि वे सुरक्षित प्रसव की उम्मीद से अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन इलाज नहीं मिलने से उन्हें दूसरे अस्पताल का रुख करना पड़ा।हालांकि, गर्भवती महिला को भर्ती नहीं किए जाने के आरोपों पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। वहीं, चिकित्सकों और प्रशासन के बीच गतिरोध बने रहने से आम मरीजों की चिंता भी बढ़ गई है।
जामताड़ा सदर अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, सुरक्षा की मांग पर अड़े चिकित्सक
