न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 28 जुलाई रांची। झारखंड में बंगला भाषा, शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया गया है। राजधानी रांची स्थित रॉयल सियॉन होटल में आयोजित झारखंड बंगला-भाषी विकास समिति की राज्यस्तरीय बैठक में विभिन्न जिलों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से भाषा अधिकारों के समर्थन में व्यापक जनआंदोलन शुरू करने का संकल्प लिया।बैठक के दौरान वक्ताओं ने कहा कि झारखंड में बड़ी संख्या में लोग बंगला भाषा का उपयोग करते हैं, लेकिन इसके बावजूद भाषा और शिक्षा से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से उपेक्षित हैं। प्रतिनिधियों ने मांग उठाई कि राज्य में शीघ्र बंगला अकादमी की स्थापना की जाए, बंगला माध्यम की शिक्षा को मजबूत किया जाए तथा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में बंगला विभागों को बंद करने जैसे किसी भी प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही बंगला को प्राप्त द्वितीय राजभाषा का दर्जा पूरी तरह लागू करने की भी मांग की गई।समिति के सदस्यों ने कहा कि इन मांगों को लेकर पहले भी सरकार को कई बार ज्ञापन और सुझाव सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से बंगला समाज में निराशा बढ़ रही है। ऐसे में अब राज्यभर में जनजागरण अभियान और लोकतांत्रिक आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया है, ताकि सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जा सके।बैठक में संगठन की नई राज्य कार्यकारिणी का भी गठन किया गया। सिद्धार्थ घोष, तापस मित्र, देवज्योति पाल और मनोज सरकार को संरक्षक बनाया गया, जबकि अरूप चट्टोपाध्याय को अध्यक्षीय दायित्व सौंपा गया। डॉ. दुर्गादास भंडारी और विश्वनाथ राय को सह-अध्यक्ष, अचिंत्यम गुप्ता को अध्यक्ष तथा रीना मंडल को कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया। इसके अलावा विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों को उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव, सहायक सचिव, कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्य की जिम्मेदारियां सौंपी गईं।बैठक के समापन पर सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि झारखंड में बंगला भाषा, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित और शांतिपूर्ण जनआंदोलन चलाया जाएगा।
झारखंड में बंगला भाषा के अधिकारों की लड़ाई तेज करने का ऐलान, राज्यव्यापी जनआंदोलन की तैयारी
