न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 11 अगस्त रांची। झारखंड में बंगला भाषा और बंगाली समुदाय के अधिकारों को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। झारखंड बंगाली भाषी विकास समिति के बैनर तले सोमवार को विधानसभा के समक्ष रांची के कुटे मैदान में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य में तत्काल बंगला अकादमी के गठन, बंगला माध्यम के विद्यालयों में पर्याप्त पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने और विश्वविद्यालयों में बंगला विभागों को संरक्षित रखने सहित कई मांगें सरकार के सामने रखीं।धरना कार्यक्रम में पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, धनबाद, साहिबगंज, गोड्डा, गिरिडीह, पाकुड़, दुमका, जामताड़ा, देवघर और रांची समेत विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में बंगाली भाषी लोग, विद्यार्थी और समर्थक शामिल हुए। लोगों ने मातृभाषा में शिक्षा के अधिकार को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की।समिति के प्रवक्ता राजेश राय ने कहा कि अविभाजित बिहार के समय बंगला अकादमी के माध्यम से बंगला भाषा के विकास और शिक्षा को बढ़ावा दिया जाता था। झारखंड गठन के समय भी बंगला अकादमी के गठन को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन राज्य बने 26 वर्ष बीत जाने के बावजूद यह मांग पूरी नहीं हुई।उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के कई विद्यालयों में तीसरी से आठवीं कक्षा तक बंगला भाषा की पढ़ाई के लिए समुचित पाठ्यक्रम और पुस्तकों का अभाव है। वहीं, कम संख्या में विद्यार्थियों का हवाला देकर कुछ कॉलेजों से बंगला विभाग हटाने की प्रक्रिया भी चिंता का विषय है।धरनास्थल पर प्रदर्शनकारियों ने “बंगला भाषा का अधिकार चाहिए” और “मातृभाषा की शिक्षा सुनिश्चित करो” जैसे नारे लगाए। कार्यक्रम में समिति की कार्यकारी अध्यक्ष रीना मंडल, दिलजॉय घोष, तापस चट्टोपाध्याय, सुब्रत घोष, सजल बंद्योपाध्याय, प्रतिमा घोष, कंचन गोपाल मंडल, आशीष आचार्य और समीर मित्रा सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
झारखंड में बंगला अकादमी की मांग तेज, विधानसभा के समक्ष बंगाली भाषियों का धरना
