बंद स्टील फाउंड्री को लोकोमोटिव POH केंद्र में बदलने की मांग, CRMC ने रेलवे बोर्ड से पहल की अपील

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 25 सितंबर चित्तरंजन। चित्तरंजन रेलवे में बंद पड़ी स्टील फाउंड्री के बुनियादी ढांचे के पुनः उपयोग को लेकर चित्तरंजन रेलवेमेंस कांग्रेस (CRMC) ने पहल की है। संगठन के महासचिव इंद्रजीत सिंह ने 24 सितंबर को CLW के महाप्रबंधक को पत्र भेजकर फाउंड्री परिसर को इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के POH (Periodic Overhaul) और कंपोनेंट ओवरहॉल केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा है।पत्र में कहा गया है कि वर्ष 1963 में स्थापित स्टील फाउंड्री ने लंबे समय तक भारतीय रेलवे के लिए महत्वपूर्ण स्टील कास्टिंग और विभिन्न रेल उपकरणों का निर्माण किया। यहां बोगी, बोल्स्टर, कपलर, बैलास्ट ब्लॉक, स्ट्राइकर कास्टिंग, साइड फ्रेम और सेंटर पिवट जैसे कई घटकों का उत्पादन होता था। फाउंड्री को RDSO की क्लास-ए मान्यता भी प्राप्त थी।CRMC के अनुसार, 16 मार्च 2024 के आदेश के बाद यहां उत्पादन बंद कर दिया गया और प्लांट व मशीनरी हटाए जाने के बाद परिसर फिलहाल खाली पड़ा है। हालांकि, फाउंड्री की जमीन, शेड, क्रेन, रेल ट्रैक, सड़क, बिजली-पानी तथा मटेरियल हैंडलिंग जैसी सुविधाएं अब भी मौजूद हैं।संगठन का तर्क है कि इस तैयार औद्योगिक ढांचे का उपयोग कर CLW में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के रखरखाव और ओवरहॉल की अतिरिक्त क्षमता विकसित की जा सकती है। पत्र में बताया गया कि 20-21 अगस्त 2026 को रेलवे बोर्ड-NFIR PNM बैठक के दौरान भी रेलवे बोर्ड के अधिकारी के समक्ष इस प्रस्ताव को रखा गया था।CRMC ने NFIR से रेलवे बोर्ड के स्तर पर पहल करते हुए DPR तैयार कराने, तकनीकी-आर्थिक अध्ययन, संयुक्त निरीक्षण और चरणबद्ध तरीके से POH-कम-कंपोनेंट ओवरहॉल केंद्र विकसित करने की मांग की है। संगठन के मुताबिक इससे रेलवे की मौजूदा संपत्ति का उपयोग होगा और CLW की उत्पादन व रखरखाव क्षमता को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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