मिट्टी की जांच से लेकर स्वास्थ्य कार्ड तक, 70 विद्यार्थियों ने सीखी वैज्ञानिक कृषि की पाठशाला

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 26 सितंबर जामताड़ा। मिट्टी की गुणवत्ता, पोषक तत्वों और वैज्ञानिक कृषि पद्धति को लेकर विद्यार्थियों में व्यावहारिक समझ विकसित करने के उद्देश्य से शनिवार को पीएम श्री राजकीय उत्क्रमित उच्च विद्यालय, शहरडाल में मृदा स्वास्थ्य मिशन के तहत एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के करीब 70 विद्यार्थियों ने भाग लिया।प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को खेत से मिट्टी का नमूना लेने की सही विधि से लेकर उसके परीक्षण और मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार करने तक की प्रक्रिया समझाई गई। विशेषज्ञों ने बताया कि अच्छी फसल के लिए केवल बीज और सिंचाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि खेत की मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति की जानकारी भी जरूरी है। मृदा परीक्षण के जरिए मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश समेत आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता का आकलन किया जा सकता है।छात्रों को बताया गया कि मिट्टी का नमूना यदि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नहीं लिया जाए तो परीक्षण का परिणाम प्रभावित हो सकता है। इसलिए खेत के अलग-अलग हिस्सों से उचित तरीके से नमूना एकत्र कर उसे जांच के लिए भेजना आवश्यक है। प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार किया जाता है, जो किसानों को खेत की जरूरत के अनुसार पोषक तत्व और उर्वरक इस्तेमाल करने में मदद करता है।प्रशिक्षकों ने विद्यार्थियों को समझाया कि बिना मृदा जांच के लगातार रासायनिक खाद का इस्तेमाल मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संतुलित मात्रा में उर्वरक का प्रयोग करने से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के साथ फसल उत्पादन को भी बेहतर किया जा सकता है।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने मृदा संरक्षण, उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक खेती से जुड़े सवाल पूछे। प्रशिक्षकों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।मौके पर विद्यालय के प्राचार्य सुजीत कुमार मेहता, उप परियोजना निदेशक आत्मा संजय कुमार सिंह, कार्यक्रम सहायक रमन श्रीवास्तव, कृषि विज्ञान केंद्र जामताड़ा के प्रतिनिधि तथा प्रखंड तकनीकी प्रबंधक मो. इकबाल हुसैन समेत अन्य कर्मी मौजूद रहे। विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण विद्यार्थियों को कृषि और पर्यावरण संबंधी विषयों की व्यावहारिक समझ देने के साथ उन्हें अपने परिवार और आसपास के किसानों को जागरूक करने में भी सक्षम बनाते हैं।

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