झारखंड आंदोलन के सिपाही रवि ठाकुर नहीं रहे, क्षेत्र में शोक की लहर

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 13 जून 2026 मिहिजाम। झारखंड आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ आंदोलनकारी रवि ठाकुर का शुक्रवार को निधन हो गया। उनके असामयिक निधन से मिहिजाम सहित पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। रामनगर निवासी 59 वर्षीय रवि ठाकुर लंबे समय से सामाजिक और जनहित के मुद्दों से जुड़े रहे थे तथा झारखंड आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी रही थी। उनके निधन की खबर मिलते ही परिचितों, शुभचिंतकों और आंदोलन से जुड़े साथियों में दुख की लहर दौड़ गई।जानकारी के अनुसार, रवि ठाकुर पिछले कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण उनका उपचार दुर्गापुर के एक निजी अस्पताल में कराया जा रहा था। परिजन और चिकित्सक उनके स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद लगाए हुए थे, लेकिन लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रांची ले जाने का निर्णय लिया गया।शुक्रवार को परिजन उन्हें इलाज के लिए रांची लेकर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में अचानक उनकी तबीयत अधिक बिगड़ गई। परिजनों ने उन्हें बचाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। रांची पहुंचने से पहले ही उन्होंने रास्ते में अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना जैसे ही मिहिजाम पहुंची, परिवार और शुभचिंतकों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।रवि ठाकुर का जीवन संघर्ष, सामाजिक सरोकार और जनसेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा। झारखंड आंदोलन के दौरान उन्होंने अलग राज्य की मांग को लेकर चलाए गए विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाई थी। आंदोलन के दिनों में वे क्षेत्र के युवाओं और आम लोगों को जागरूक करने का कार्य भी करते थे। सामाजिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी और लोगों से उनका आत्मीय व्यवहार उन्हें क्षेत्र में एक सम्मानित पहचान दिलाता था।स्वर्गीय रवि ठाकुर, स्वर्गीय हीरा लाल ठाकुर के पुत्र थे। वे अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनके निधन से न केवल परिवार को अपूरणीय क्षति हुई है, बल्कि झारखंड आंदोलन से जुड़े लोगों ने भी एक पुराने साथी को खो दिया है।क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं, आंदोलनकारियों और स्थानीय लोगों ने उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। लोगों ने कहा कि रवि ठाकुर का योगदान और संघर्ष हमेशा याद किया जाएगा। उनके निधन से क्षेत्र ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा समाज और झारखंड की पहचान के लिए समर्पित किया था।

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