जल सहिया चयन पर बवाल: ‘बाहरी’ बताकर योग्य महिलाओं को किया गया दरकिनार, जांच की मांग तेज

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 13 जून 2026 जामताड़ा। जामताड़ा प्रखंड के सुपायडीह पंचायत अंतर्गत पाकडीह गांव में जल सहिया चयन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरतने, योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी करने और महिलाओं की भागीदारी को नजरअंदाज करने के आरोपों के साथ कई अभ्यर्थियों एवं ग्रामीण महिलाओं ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को संयुक्त आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही जांच पूरी होने तक चयन प्रक्रिया पर रोक लगाने की भी अपील की गई है।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जल सहिया पद के लिए कुल आठ महिलाओं ने आवेदन दिया था। इनमें कई उम्मीदवार शैक्षणिक योग्यता और निर्धारित सरकारी मानकों के अनुरूप पात्र थीं। इसके बावजूद ग्रामसभा के दौरान कुछ अभ्यर्थियों को “बाहरी” करार देकर उनके समर्थन को प्रभावित किया गया। आरोप है कि चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने के बजाय कुछ लोगों ने एक विशेष उम्मीदवार के पक्ष में माहौल तैयार किया, जिससे योग्य दावेदारों को अवसर नहीं मिल सका।आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिन महिलाओं को बाहरी बताया गया, वे लंबे समय से गांव में रह रही हैं और सामाजिक गतिविधियों, ग्रामसभा तथा विभिन्न विकास कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेती रही हैं। ऐसे में केवल बाहरी-भीतरी के आधार पर उन्हें चयन प्रक्रिया से हाशिए पर धकेलना अनुचित और भेदभावपूर्ण कदम बताया गया है।ग्रामीण महिलाओं ने एक और गंभीर आरोप लगाया है कि जल सहिया चयन जैसी महिला-केंद्रित प्रक्रिया में महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित नहीं की गई। उनका कहना है कि ग्रामसभा में महिलाओं की उपस्थिति अपेक्षित स्तर तक नहीं थी और उपस्थित महिलाओं की राय को भी पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। इससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।प्रखंड कार्यालय पहुंचकर आवेदन देने वालों में मौसमी राय, शमा बानो, पुतुल बाउरी, मुनमुन खातून, रितु बाउरी और आशा परवीन शामिल थीं। इनके अलावा बबली बाउरी, समानती बाउरी, माधवी बाउरी, नेहा बाउरी, देवी बाउरी, टुम्पा बाउरी, मेनका बाउरी, लखुमनी बाउरी, पिंकी बाउरी, चंचला बाउरी और अनुपमा मौजेस समेत कई महिलाओं ने भी हस्ताक्षर कर आपत्ति दर्ज कराई।आवेदनकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि ग्रामसभा की कार्यवाही की विस्तृत समीक्षा कराई जाए, पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो तथा यदि नियमों के उल्लंघन या पक्षपात की पुष्टि होती है तो चयन को रद्द कर पुनः पारदर्शी और नियमसम्मत प्रक्रिया के तहत चयन कराया जाए। मामले को लेकर पंचायत क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज है और अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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