न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 27 जून 2026 जामताड़ा। मानसून के दौरान नदियों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए बालू खनन पर लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद जामताड़ा जिले में अवैध बालू उठाव रुकने का नाम नहीं ले रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चालना पंचायत के राशीपारा गांव के समीप बराकर नदी स्थित करमाटार घाट पर प्रतिदिन तड़के बड़े पैमाने पर बालू का अवैध खनन किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।गौरतलब है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तथा केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी सस्टेनेबल सैंड माइनिंग गाइडलाइंस-2016 और इंफोर्समेंट एंड मॉनिटरिंग गाइडलाइंस फॉर सैंड माइनिंग-2020 के तहत मानसून अवधि में नदी से बालू खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसी दिशा में जामताड़ा के उपायुक्त आलोक कुमार ने 10 जून से 15 अक्टूबर तक जिले की सभी नदियों से बालू उठाव पर रोक लगाने का आदेश जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों को सख्त निगरानी और कार्रवाई के निर्देश दिए थे।इसके बावजूद स्थानीय लोगों का दावा है कि करमाटार घाट पर प्रतिदिन सुबह करीब तीन बजे से ही अवैध खनन शुरू हो जाता है। बताया जाता है कि रोजाना 300 से अधिक ट्रैक्टर बालू की ढुलाई में लगे रहते हैं। इतना ही नहीं, मजदूरों के ठहरने के लिए घाट के समीप अस्थायी शेड भी बनाया गया है, जिससे पूरे नेटवर्क के सुनियोजित तरीके से संचालित होने की आशंका जताई जा रही है।ग्रामीणों के अनुसार यहां से बालू लदे ट्रैक्टर करमाटार, राशीपारा, करमा और धोबना गांव होते हुए फुलजोरी मोड़ के समीप बेजड़ा घाट तक पहुंचते हैं, जहां बालू का भंडारण कर बड़े ट्रकों और हाईवा के माध्यम से अन्य क्षेत्रों में भेजा जाता है।लगातार भारी वाहनों की आवाजाही से गांवों की संकरी सड़कें तेजी से क्षतिग्रस्त हो रही हैं। सड़क पर बिखर रही बालू के कारण दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। कई ग्रामीणों ने अपने घरों के सामने बड़े पत्थर रख दिए हैं ताकि तेज रफ्तार वाहनों से किसी प्रकार का नुकसान न हो।सबसे अहम सवाल यह है कि जामताड़ा थाना से करीब 19 किलोमीटर की दूरी और जिला मुख्यालय के निकट इतने बड़े स्तर पर कथित अवैध बालू खनन की गतिविधियां संचालित होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही है। यदि स्थानीय लोगों के आरोप सही हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक आदेशों और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी का मामला है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय भी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
मानसून प्रतिबंध के बावजूद बराकर नदी से धड़ल्ले से बालू उठाव, प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल
