शहादत को सलाम: अमर वीर प्रमोद कुमार की 18वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा सम्मान, परिजनों ने नम आंखों से किया याद

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 30 जून 2026 मिहिजाम। झारखंड पुलिस के वीर अधिकारी और अमर शहीद प्रमोद कुमार की 18वीं पुण्यतिथि मंगलवार को उनके पैतृक आवास मिहिजाम के कुर्मीपाड़ा में श्रद्धा, सम्मान और सादगीपूर्ण वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर परिवार के सदस्यों, स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्र के प्रति उनके अद्वितीय बलिदान को नमन किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान भावुक माहौल बना रहा और उपस्थित लोगों ने शहीद के साहस एवं कर्तव्यनिष्ठा को याद किया।पुण्यतिथि कार्यक्रम की शुरुआत पूजा-अर्चना और श्रद्धांजलि सभा से हुई। परिजनों ने शहीद प्रमोद कुमार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इसके बाद डाकबंगला परिसर स्थित उनकी प्रतिमा पर भी लोगों ने पहुंचकर माल्यार्पण किया और दो मिनट का मौन रखकर उनके सर्वोच्च बलिदान को याद किया।इस अवसर पर डॉ. एल.एन. प्रसाद, शिव शंकर प्रसाद, शबनम देवी, मनीष कुमार, अनिमेष कुमार सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने कहा कि प्रमोद कुमार ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए जिस साहस और समर्पण का परिचय दिया, वह आज भी पुलिस बल और युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि देश और समाज की सुरक्षा के लिए समर्पित व्यक्ति अपने कर्तव्य से कभी पीछे नहीं हटता।गौरतलब है कि प्रमोद कुमार वर्ष 2008 में झारखंड पुलिस में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) के रूप में बुंडू में पदस्थापित थे। उस समय वे एक चर्चित लूटकांड की जांच और अपराधियों की धरपकड़ के अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। 30 जून 2008 को हूल दिवस के अवसर पर जांच के सिलसिले में जंगल के रास्ते से गुजरते समय नक्सलियों द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंग में उनकी सरकारी गाड़ी विस्फोट का शिकार हो गई। इस भीषण घटना में प्रमोद कुमार सहित कई पुलिसकर्मी वीरगति को प्राप्त हुए। यह घटना झारखंड के इतिहास की सबसे दर्दनाक नक्सली घटनाओं में गिनी जाती है।शहीद की भाभी मंजू देवी ने भावुक स्वर में कहा कि परिवार आज भी प्रमोद कुमार की कमी गहराई से महसूस करता है। उनका जाना एक ऐसा दर्द है, जो कभी भर नहीं सकता। हालांकि उन्हें इस बात का गर्व है कि उन्होंने राष्ट्र और राज्य की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि शहीदों के बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि प्रमोद कुमार का साहस, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा का जज़्बा आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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