मिहिजाम पहुंचे झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक, बोले– जल, जंगल, जमीन और आंदोलनकारियों के अधिकारों की लड़ाई अभी अधूरी है
न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 1 जुलाई 2026 मिहिजाम। झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक पुष्कर महतो बुधवार देर शाम मिहिजाम पहुंचे। उन्होंने शहर के एक निजी होटल में रात्रि विश्राम किया। गुरुवार को वे मिहिजाम और जामताड़ा में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में झारखंड आंदोलनकारियों के साथ संवाद करेंगे। इस दौरान उन्होंने न्यूज 61 लाइव से विशेष बातचीत में झारखंड आंदोलनकारियों की स्थिति, राज्य के संसाधनों पर अधिकार, विस्थापन, रोजगार और सम्मानजनक पेंशन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों ने वर्षों तक संघर्ष, त्याग और बलिदान देकर अलग राज्य के निर्माण का रास्ता तैयार किया, लेकिन आज भी उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे वास्तविक हकदार हैं। उन्होंने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों को न्याय के साथ सम्मान दिया जाए तथा उन्हें समाज में स्वाभिमान के साथ जीने का अधिकार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद पूरे राज्य में उन्हें झारखंड का निर्माता बताते हुए होर्डिंग लगाए गए, लेकिन आज तक उन्हें सरकारी गजट में झारखंड आंदोलनकारी के रूप में औपचारिक सम्मान नहीं दिया गया। यह आंदोलनकारियों के इतिहास और संघर्ष के साथ न्याय नहीं है।
हूल की धरती से फिर अधिकारों की आवाज
पुष्कर महतो ने कहा कि जामताड़ा और संथाल परगना की धरती सदैव अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष की प्रतीक रही है। सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव तथा फूलो-झानो जैसे वीरों ने इसी धरती से हूल आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसकी गूंज पूरे देश-दुनिया तक पहुंची। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है उनके संघर्ष और बलिदान के मूल उद्देश्य को समझने की तथा यह जानने की कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए बने कानूनों का उल्लंघन आखिर क्यों हो रहा है।उन्होंने संथाल परगना टेनेंसी (एसपीटी) कानून के पालन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि यह कानून लागू है तो फिर बड़े पैमाने पर जमीन उद्योगपतियों को कैसे हस्तांतरित की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई, पहाड़ों और नदियों का दोहन तथा लगातार हो रहा विस्थापन राज्य की मूल पहचान के लिए गंभीर खतरा बन गया है।
रॉयल्टी और मालिकाना हक चाहिए, मुफ्त की सहायता नहीं
उन्होंने कहा कि झारखंड के लोगों को दो-चार हजार रुपये की सहायता नहीं, बल्कि अपने प्राकृतिक संसाधनों पर संवैधानिक अधिकार चाहिए। राज्य को मिलने वाली 26 प्रतिशत रॉयल्टी और स्थानीय लोगों के मालिकाना हक को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि राज्य बनने के बाद भी पलायन नहीं रुका और रोजगार के अभाव में युवा आज भी दूसरे राज्यों की ओर जाने को मजबूर हैं।
स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की उठाई मांग
पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड बनने के समय लोगों ने उम्मीद की थी कि यहां के युवाओं को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता मिलेगी। लेकिन आज भी राज्य के लाखों युवाओं को उनका अधिकार नहीं मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि झारखंड में छह लाख से अधिक रिक्त पद हैं और सरकार को प्राथमिकता के आधार पर स्थानीय युवाओं की नियुक्ति करनी चाहिए।उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील करते हुए कहा कि आंदोलनकारियों के परिवारों के बच्चों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ठोस नीति बनाई जाए। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों ने अपने खून-पसीने से राज्य का निर्माण किया है, इसलिए उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
स्वतंत्रता सेनानियों जैसी मिले पहचान
झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक ने मांग की कि झारखंड आंदोलनकारियों को स्वतंत्रता सेनानियों के समान राजकीय सम्मान और पहचान दी जाए। उन्होंने कहा कि पेंशन पाने के लिए जेल जाने की बाध्यता समाप्त होनी चाहिए और सभी आंदोलनकारियों को बिना भेदभाव समान पेंशन राशि दी जानी चाहिए, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि कई आंदोलनकारी आज आर्थिक तंगी में जीवन बिता रहे हैं। उनके घरों में चाय बनाने तक के लिए दूध, चीनी और चायपत्ती उपलब्ध नहीं होती। ऐसी स्थिति आंदोलनकारियों के सम्मान को ठेस पहुंचाती है। सरकार को उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
संघर्ष हमारा, श्रेय किसी और का
पुष्कर महतो ने कहा कि अलग झारखंड राज्य के लिए संघर्ष आंदोलनकारियों ने किया, लेकिन समय-समय पर उसका श्रेय अन्य लोगों ने लिया। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों ने अपनी जवानी और जीवन संघर्ष में झोंक दिया, लेकिन आज भी उनके योगदान को अपेक्षित सम्मान नहीं मिला।उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि वे झारखंड आंदोलनकारियों के गौरव पुत्र होने के नाते उनके सम्मान और अधिकारों के लिए ऐतिहासिक निर्णय लें। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के इतिहास को फर्जी बताकर कलंकित करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए, क्योंकि झारखंड राज्य उनके संघर्ष और शहादत की देन है।पुष्कर महतो ने कहा कि उनका उद्देश्य पूरे राज्य में जाकर लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और आंदोलनकारियों के सम्मान की लड़ाई को नई दिशा देना है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सरकार संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेती है तो झारखंड आंदोलनकारियों को उनका वास्तविक सम्मान और अधिकार अवश्य मिलेगा।
