ज्योति बसु की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान, सीएलडब्ल्यू लेबर यूनियन ने मनाई 113वीं जयंती

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 9 जुलाई 2026 चित्तरंजन। पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और देश के प्रमुख ट्रेड यूनियन नेताओं में शुमार ज्योति बसु की 113वीं जयंती पर चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (सीएलडब्ल्यू) लेबर यूनियन ने अमलादही मार्केट स्थित यूनियन कार्यालय में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रमिकों, यूनियन पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने भाग लेकर ज्योति बसु के राजनीतिक जीवन, श्रमिक हितों के लिए उनके संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद किया।सभा की अध्यक्षता यूनियन अध्यक्ष आर. एस. चौहान ने की। कार्यक्रम की शुरुआत ज्योति बसु के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर और दो मिनट का मौन रखकर की गई। वक्ताओं ने कहा कि बसु का जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और सामाजिक समानता के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया।अपने संबोधन में आर. एस. चौहान ने कहा कि ज्योति बसु को अक्सर पश्चिम बंगाल के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता के रूप में याद किया जाता है, जबकि भारतीय श्रमिक आंदोलन को मजबूत करने में उनकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को उनके संघर्ष, विचार और ट्रेड यूनियन आंदोलन में दिए गए योगदान से परिचित कराना समय की आवश्यकता है।यूनियन के महासचिव राजीव गुप्ता ने रेलवे और सार्वजनिक क्षेत्र की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए इंग्लैंड के रेलवे निजीकरण का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि निजीकरण के असफल होने के बाद वहां दोबारा राष्ट्रीयकरण करना पड़ा, जिससे सार्वजनिक उपक्रमों के महत्व को समझा जा सकता है। उन्होंने बताया कि इंग्लैंड में शिक्षा के दौरान ज्योति बसु श्रमिक आंदोलनों से जुड़े और भारत लौटने के बाद रेलवे कर्मचारियों के हितों के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि सीएलडब्ल्यू जैसी महत्वपूर्ण उत्पादन इकाई के संरक्षण और विकास में भी बसु का उल्लेखनीय योगदान रहा।देशबंधु कॉलेज के प्राध्यापक बिप्लब चौधरी ने इतिहास को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर समझने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सूचनाओं पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्रमाणिक स्रोतों का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने विभाजन, शरणार्थी पुनर्वास और मरिचझांपी जैसे विषयों पर फैली भ्रांतियों का भी उल्लेख किया।मुख्य वक्ता एवं देशबंधु कॉलेज के पूर्व प्राचार्य अरुणाभ दासगुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में ज्योति बसु जैसे दूरदर्शी और अनुभवी नेतृत्व की कमी महसूस की जा रही है। उन्होंने धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय और समानता को भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला बताते हुए कहा कि वामपंथी विचारधारा किसी की धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि संविधान में निहित समान अधिकार और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था की पक्षधर रही है।कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने ज्योति बसु के आदर्शों, श्रमिक हितों की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक न्याय की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ सभा संपन्न हुई।

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