न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल मित्रा 2 अक्टूबर आसनसोल। शहर में संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर एक ही परिवार के दो पक्ष आमने-सामने हैं। दोनों ओर से विवादित संपत्ति पर अधिकार जताते हुए एक-दूसरे पर जबरन कब्जे और दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं। वहीं, एक पक्ष ने पुराने दस्तावेजों की वैधता और पुलिस जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल मामले में सामने आए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।एक पक्ष की महिला का दावा है कि विवादित मकान पैतृक संपत्ति नहीं, बल्कि उनके परिवार ने खरीदकर रजिस्ट्री कराई थी। उनका आरोप है कि इसके बावजूद दूसरे पक्ष द्वारा संपत्ति पर कब्जे की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि आपसी बातचीत से विवाद सुलझाने का प्रयास किया गया, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।महिला ने परिवार पर दबाव बनाने, हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराने और वाहनों में तोड़फोड़ का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, करीब दो महीने पहले पांच गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे लगभग 60 हजार रुपये की क्षति हुई। उन्होंने घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज होने की बात भी कही।दूसरी ओर, दूसरे पक्ष के एक व्यक्ति ने इन आरोपों को खारिज करते हुए संपत्ति पर अपना अधिकार बताया। उनका कहना है कि वास्तविक विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की गई थी।इस बीच सम्पा सरकार ने दस्तावेजों और पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, केस नंबर 298/2026 के तहत मामला सामने आया है। उनका आरोप है कि उनकी शिकायत कथित जालसाजी से संबंधित थी, लेकिन पुलिस ने जालसाजी की धारा के बजाय धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं लगाईं।सम्पा का दावा है कि संपत्ति मूल रूप से उनके पिता के नाम थी और पुराने दस्तावेजों में वर्ष 2016 में पिता द्वारा संपत्ति हस्तांतरण का उल्लेख है, जबकि उनकी मृत्यु वर्ष 2012 में हो चुकी थी। इसी आधार पर उन्होंने दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया है।उन्होंने संपत्ति की कीमत करोड़ों रुपये होने और किराये से आय का भी दावा किया। साथ ही पिछले वर्ष हुई कथित मारपीट की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया।मामले में दोनों पक्षों के दावे परस्पर विरोधी हैं। संपत्ति के स्वामित्व, दस्तावेजों की वैधता और लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित रिकॉर्ड, पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
करोड़ों की संपत्ति पर परिवार में घमासान, कब्जे से लेकर दस्तावेजों की वैधता तक उठे सवाल

