न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 29 जून 2026 चित्तरंजन। रेलनगरी चित्तरंजन के फतेहपुर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को रथयात्रा महोत्सव से पूर्व पारंपरिक विधि-विधान के साथ भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पवित्र स्नानयात्रा का आयोजन किया गया। धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन तथा जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।मंदिर के पुजारियों और आयोजन समिति के सदस्यों ने शास्त्रोक्त विधि से भगवान का विशेष अभिषेक कराया। पवित्र जल, सुगंधित द्रव्यों, चंदन और पुष्पों से भगवान का स्नान कराया गया। श्रद्धालुओं ने इस दिव्य अनुष्ठान का दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।आयोजकों ने बताया कि स्नानयात्रा का विशेष महत्व ज्येष्ठ पूर्णिमा से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का 108 कलशों के पवित्र जल से अभिषेक किया जाता है। स्नान के बाद भगवान को ज्वर (अनसर) होने की मान्यता है, जिसके कारण वे लगभग 15 दिनों तक भक्तों के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं देते। इस अवधि में भगवान विश्राम करते हैं और विशेष औषधीय सेवा एवं उपचार की परंपरा निभाई जाती है।उन्होंने बताया कि भगवान के स्वस्थ होने के बाद नवयौवन दर्शन का आयोजन होता है, जिसमें भगवान नए स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसके बाद भव्य रथयात्रा निकाली जाती है, जिसमें भगवान अपने भाई-बहन के साथ रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और भगवान के भक्तों के बीच विशेष आस्था का केंद्र मानी जाती है।स्नानयात्रा को भगवान के शारीरिक और आध्यात्मिक शुद्धिकरण का प्रतीक भी माना जाता है। इस अनुष्ठान के माध्यम से श्रद्धालु भगवान के प्रति अपनी अटूट आस्था और समर्पण व्यक्त करते हैं। आयोजकों ने कहा कि रथयात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारे, सेवा और सांस्कृतिक एकता का संदेश देने वाला महापर्व है।कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। स्नानयात्रा के सफल आयोजन के बाद अब श्रद्धालुओं की निगाहें आगामी भव्य रथयात्रा महोत्सव पर टिकी हैं, जिसकी तैयारियां मंदिर समिति की ओर से अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।
रथयात्रा से पहले श्रद्धा का महापर्व: चित्तरंजन के जगन्नाथ मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई भगवान की स्नानयात्रा
