न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 30 जून 2026 जामताड़ा। सिद्धू-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय से संबद्ध जामताड़ा महाविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-30 के स्नातक नामांकन के लिए जारी विषय सूची में बांग्ला विषय को स्थान नहीं मिलने से छात्रों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। सीमावर्ती जिले में बांग्ला भाषा बोलने वाले विद्यार्थियों की बड़ी संख्या होने के कारण इस फैसले को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि यह केवल एक शैक्षणिक विषय का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्र की भाषाई विरासत और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है।जामताड़ा की भौगोलिक स्थिति पश्चिम बंगाल की सीमा से सटी होने के कारण जिले के कई गांवों और कस्बों में बांग्ला भाषा का व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है। ऐसे में वर्षों से छात्र स्नातक स्तर पर बांग्ला विषय का चयन कर अपनी उच्च शिक्षा पूरी करते रहे हैं। लेकिन इस बार नामांकन सूची से विषय के हटने के बाद विद्यार्थियों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है।अभिभावकों का कहना है कि जिले में उच्च शिक्षा के संसाधन पहले ही सीमित हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बच्चों को दूसरे जिले या राज्य भेजकर पढ़ाना आसान नहीं है। ऐसे में यदि स्थानीय महाविद्यालय में बांग्ला विषय उपलब्ध नहीं रहेगा तो कई छात्र अपनी पसंद का विषय छोड़ने के लिए मजबूर होंगे। इससे न केवल उनकी शैक्षणिक रुचि प्रभावित होगी, बल्कि भविष्य में रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर भी असर पड़ सकता है।छात्रों ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि मातृभाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर छिनना उनके लिए निराशाजनक है। उनका मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्र की भाषाई आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विषय को हटाने के बजाय उसे और सशक्त किया जाना चाहिए।स्थानीय सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने भी बांग्ला विषय को दोबारा बहाल करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करना होना चाहिए। लोगों को उम्मीद है कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए इस निर्णय की समीक्षा करेगा और आगामी नामांकन प्रक्रिया में बांग्ला विषय को फिर से शामिल करने की दिशा में सकारात्मक पहल करेगा। फिलहाल इस मुद्दे पर पूरे जिले की निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
जामताड़ा कॉलेज में स्नातक से बांग्ला विषय गायब, छात्रों-अभिभावकों ने उठाए सवाल; मातृभाषा की पढ़ाई बचाने की मांग तेज
