न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल मित्रा 7 अगस्त बाराबनी। कभी गौवंश की रंभाहट, घंटियों की मधुर ध्वनि और धार्मिक आयोजनों से गुलजार रहने वाली बाराबनी प्रखंड के दोमहानी बाजार की करीब सौ वर्ष पुरानी गौशाला अब नए रूप में लौटने की तैयारी में है। लगभग दो दशकों से उपेक्षा का शिकार यह ऐतिहासिक स्थल अब स्थानीय लोगों की सामूहिक पहल से पुनर्जीवित हो रहा है। मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य शुरू होने से क्षेत्रवासियों में नई उम्मीद जगी है कि जल्द ही यह स्थान फिर से धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा।लंबे समय तक देखरेख के अभाव में गौशाला की इमारत पूरी तरह जर्जर हो गई थी। भवन की स्थिति खतरनाक होने पर यहां रखे गए मवेशियों और जरूरी सामान को सुरक्षा के मद्देनजर आसनसोल गौशाला स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके बाद यहां की सभी गतिविधियां बंद हो गईं और समय के साथ यह परिसर वीरान होता चला गया।अब स्थानीय नागरिकों के सहयोग से भवन का पुनर्निर्माण तेजी से किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक इमारत की मरम्मत नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने का प्रयास है।इस अभियान से जुड़े प्रमुख आयोजकों में शामिल तथा भाजपा बाराबनी मंडल-1 के सह-उपाध्यक्ष प्रसेनजीत गड़ाई ने बताया कि दोमहानी गौशाला लंबे समय से सनातन समाज की आस्था और परंपरा का प्रतीक रही है। इसे आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित कर फिर से गौ-सेवा और गौ-संरक्षण का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा।उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कार्तिक माह में लगने वाला पारंपरिक सात से आठ दिनों का पूजा उत्सव, मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी दोबारा शुरू किया जाएगा, जो कभी इस इलाके की सबसे बड़ी पहचान हुआ करता था।हालांकि स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि इतनी महत्वपूर्ण विरासत को पिछले 20 वर्षों तक उपेक्षित क्यों रहने दिया गया। इसके बावजूद वर्तमान पहल ने लोगों में नया उत्साह भर दिया है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि जनसहयोग से चल रहा यह अभियान आने वाले समय में दोमहानी की सांस्कृतिक पहचान को फिर से नई ऊंचाई देगा।
20 साल बाद फिर जीवंत होगी दोमहानी की ऐतिहासिक गौशाला: स्थानीय लोगों ने संभाली विरासत बचाने की जिम्मेदारी
