रांची विश्वविद्यालय में बंगला विषय की सीटों में कटौती पर उठे सवाल, बंगला भाषी समाज ने जताई कड़ी आपत्ति

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 6 जून 2026 रांची। रांची विश्वविद्यालय के अधीन संचालित विभिन्न कॉलेजों में स्नातक नामांकन के लिए जारी सीट सूची को लेकर झारखंड के बंगला भाषी समाज में असंतोष बढ़ता जा रहा है। बंगला भाषी संगठनों का आरोप है कि कई कॉलेजों में बंगला विषय के लिए सीटों का प्रावधान नहीं किया गया है, जिससे इस भाषा के विद्यार्थियों के समक्ष उच्च शिक्षा प्राप्त करने का संकट खड़ा हो सकता है। इस मुद्दे को लेकर झारखंड बंगला भाषी उन्नयन समिति (जेबीबीयूएस) ने चिंता व्यक्त करते हुए इसे भाषा और शिक्षा के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।समिति की कार्यकारी अध्यक्ष रीना कुमारी मंडल ने जारी बयान में कहा कि झारखंड एक बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक राज्य है, जहां लंबे समय से बड़ी संख्या में बंगला भाषी समुदाय निवास करता है। धनबाद, जामताड़ा, देवघर, पाकुड़, साहिबगंज, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जैसे जिलों में बंगला भाषी आबादी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में उच्च शिक्षा संस्थानों में बंगला विषय की अनदेखी छात्रों के हितों के विपरीत है।उन्होंने कहा कि बंगला झारखंड की मान्यता प्राप्त द्वितीय राजभाषाओं में शामिल है, इसलिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इसके अध्ययन-अध्यापन की समुचित व्यवस्था होना आवश्यक है। यदि विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में पढ़ाई का अवसर नहीं मिलेगा तो इसका सीधा असर भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर पड़ेगा। इससे भविष्य में बंगला विषय के प्रति छात्रों की रुचि भी प्रभावित हो सकती है।समिति ने आशंका जताई कि यदि यही स्थिति बनी रही तो बंगला भाषा के उच्च शिक्षा से धीरे-धीरे गायब होने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसे केवल शैक्षणिक मुद्दा नहीं बल्कि भाषाई पहचान और सांस्कृतिक अधिकारों से जुड़ा विषय बताया गया है।झारखंड बंगला भाषी उन्नयन समिति ने राज्य सरकार, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग तथा रांची विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि जिन कॉलेजों में बंगला विषय के लिए सीटें नहीं रखी गई हैं, वहां तत्काल इसकी व्यवस्था की जाए। साथ ही विषय के लिए पर्याप्त सीटों का निर्धारण, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति और बंगला भाषी विद्यार्थियों के शैक्षणिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।समिति ने स्पष्ट किया कि बंगला भाषा और उससे जुड़े विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में आंदोलन जारी रहेगा तथा भाषा की उपेक्षा को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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