रेल कर्मचारियों का हुंकार: श्रम संहिताओं, एनपीएस और रेलवे निजीकरण के खिलाफ चित्तरंजन में गूंजा विरोध

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 14 जून 2026 चित्तरंजन। केंद्र सरकार की श्रम नीतियों, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) तथा रेलवे के निजीकरण के खिलाफ रविवार को चित्तरंजन में रेल कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों ने जोरदार आवाज बुलंद की। चित्तरंजन मजदूर यूनियन (एआईयूटीयूसी संबद्ध) के बैनर तले आयोजित “सभा सह नुक्कड़ कार्यक्रम” में वक्ताओं ने श्रमिक हितों पर पड़ रहे प्रभावों को लेकर चिंता जताई और सरकार से इन नीतियों पर पुनर्विचार करने की मांग की।कार्यक्रम का आयोजन सुबह लगभग 9 बजे अमलादही बाजार स्थित 31 मोड़, पुनर्जन्म भवन के समीप किया गया। सभा की अध्यक्षता चित्तरंजन मजदूर यूनियन के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने की। इस दौरान यूनियन के सदस्यों और समर्थकों ने श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता का संदेश दिया।सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नई श्रम संहिताओं के लागू होने से मजदूरों के कई पारंपरिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उनका आरोप था कि श्रम कानूनों में किए गए बदलावों से कर्मचारियों की सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण कमजोर पड़ने का खतरा है। साथ ही राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पुरानी पेंशन व्यवस्था कर्मचारियों को अधिक सुरक्षा प्रदान करती थी, जबकि एनपीएस में भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है।कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित एआईयूटीयूसी, पश्चिम बर्दवान के जिला महासचिव सव्यसाची गोस्वामी ने भी अपने संबोधन में रेलवे क्षेत्र में बढ़ती निजीकरण की प्रक्रिया पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रेलवे देश की सार्वजनिक संपत्ति है और इसके निजीकरण से न केवल कर्मचारियों के हित प्रभावित होंगे, बल्कि आम यात्रियों पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।सभा के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने श्रमिकों से संगठित रहने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मजदूर वर्ग की एकजुटता ही उनके हितों की सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत है।काफी संख्या में श्रमिकों और समर्थकों की उपस्थिति में आयोजित यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सभा और नुक्कड़ बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

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