सुरक्षा कारणों से हिंदुस्तान केबल्स परिसर का 60 मीटर ऊंचा बीएसएनएल टावर ध्वस्त, नए टावर की मांग तेज

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल मित्रा 17 जुलाई 2026 रूपनारायणपुर। वर्षों से बंद पड़े हिंदुस्तान केबल्स कारखाना परिसर में स्थित करीब 60 मीटर ऊंचे पुराने बीएसएनएल टावर को शुक्रवार को सुरक्षा कारणों से हटाने की कार्रवाई की गई। टावर को तोड़ने का कार्य शुरू होते ही स्थानीय लोगों में हलचल मच गई। कई लोगों ने इसे बिना अनुमति की कार्रवाई समझकर विरोध जताया, लेकिन संबंधित विभाग के दस्तावेज और प्रशासनिक स्वीकृति दिखाए जाने के बाद स्थिति सामान्य हो गई।जानकारी के अनुसार, कारखाने के मुख्य प्रवेश द्वार के दाहिनी ओर स्थित अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) भवन के पास बने इस टावर को कानूनी प्रक्रिया के तहत चरणबद्ध तरीके से ध्वस्त किया गया। पूरी कार्रवाई के दौरान रूपनारायणपुर थाना पुलिस मौके पर तैनात रही और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी। वहीं, भाजपा नेता संजय शर्मा सहित स्थानीय लोगों ने दस्तावेजों की जांच के बाद कार्रवाई पर संतोष जताया।बीएसएनएल के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने बताया कि एक समय यह टावर पूरे इलाके में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं का प्रमुख आधार था। हालांकि वर्ष 2020 के बाद हिंदुस्तान केबल्स में कर्मचारियों की संख्या तेजी से घट गई। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के बाद अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी यहां से चले गए, जिसके कारण टावर का रखरखाव प्रभावित हुआ। इसी दौरान असामाजिक तत्वों ने टावर से जुड़े कई कीमती केबल काट लिए, जिससे इसकी तकनीकी स्थिति लगातार खराब होती चली गई।लंबे समय तक रखरखाव नहीं होने के कारण टावर जर्जर हो गया था। विभाग को आशंका थी कि यदि लोहे की चोरी के उद्देश्य से कोई इसके ढांचे से छेड़छाड़ करता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। इसी खतरे को देखते हुए इसे हटाने का निर्णय लिया गया।हालांकि टावर हटने के बाद स्थानीय लोगों की चिंता अब संचार सेवाओं को लेकर बढ़ गई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि रूपनारायणपुर में पहले से ही बीएसएनएल का नेटवर्क बेहद कमजोर है और पुराने टावर से किसी तरह सीमित सिग्नल मिल जाता था। अब उसके हट जाने से मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं और प्रभावित होने की आशंका है।स्थानीय नागरिकों ने बीएसएनएल अधिकारियों से मांग की है कि सुरक्षा के मद्देनजर पुराने टावर को हटाना उचित कदम हो सकता है, लेकिन क्षेत्र के उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए जल्द से जल्द आधुनिक तकनीक से लैस नया टावर स्थापित किया जाए। हालांकि निजी दूरसंचार कंपनियों के बढ़ते वर्चस्व और सरकारी स्तर पर धीमी पहल को देखते हुए निकट भविष्य में नया टावर लगने की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है।

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