न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 30 जून 2026 मिहिजाम। मुहर्रम के पावन अवसर पर क्षेत्र में धार्मिक आस्था, पारंपरिक युद्धकला और सामाजिक सौहार्द का अनूठा संगम देखने को मिला। ताजिया जुलूस और अखाड़ों के हैरतअंगेज करतबों ने लोगों का मन मोह लिया। पूरे आयोजन के दौरान विभिन्न अखाड़ों और कमेटियों के बीच बेहतर प्रदर्शन की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रही, वहीं पुलिस प्रशासन की सतर्क व्यवस्था के कारण पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।मुहर्रम के समापन के बाद स्थानीय थाना परिसर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अखाड़ों और कमेटियों को सम्मानित किया गया। थाना प्रभारी प्रदीप राणा ने विजेता टीमों को पुरस्कार देकर उनका उत्साहवर्धन किया। निर्णायक मंडली द्वारा प्रदर्शन, अनुशासन, पारंपरिक खेल-कौशल और प्रस्तुति के आधार पर विजेताओं का चयन किया गया।प्रतियोगिता में पोखातल्ला अखाड़ा ने शानदार प्रदर्शन और अनुशासित आयोजन के दम पर प्रथम स्थान हासिल किया। हाई स्कूल कमेटी को द्वितीय तथा हिल रोड कमेटी को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इसके अलावा मस्जिद रोड कमेटी और बाजारपाड़ा कमेटी को भी उनके सराहनीय प्रदर्शन और सहभागिता के लिए सांत्वना पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए थाना प्रभारी प्रदीप राणा ने कहा कि किसी भी पर्व की सफलता केवल उत्साह से नहीं, बल्कि अनुशासन, आपसी भाईचारे और सामाजिक जिम्मेदारी से तय होती है। उन्होंने सभी विजेता कमेटियों को बधाई देते हुए कहा कि जिन टीमों को इस बार पुरस्कार नहीं मिल सका, वे निराश न हों बल्कि अगले वर्ष और बेहतर तैयारी के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करें। उन्होंने सभी प्रतिभागियों के खेल कौशल और सहयोगात्मक रवैये की भी सराहना की।उन्होंने बताया कि मुहर्रम के दौरान पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी तथा डिजिटल और सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी लगातार निगरानी रखी गई, ताकि किसी प्रकार की अफवाह या असामाजिक गतिविधि से माहौल प्रभावित न हो। प्रशासन की सतर्कता और आम लोगों के सहयोग से पूरा आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।मुहर्रम के सफल आयोजन के बाद स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न कमेटियों ने पुलिस प्रशासन की सक्रिय भूमिका की सराहना की। लोगों ने कहा कि प्रशासन और समाज के आपसी सहयोग से ही ऐसे धार्मिक आयोजन शांति, सौहार्द और भाईचारे के साथ संपन्न होते हैं। इस आयोजन ने एक बार फिर सामाजिक एकता और पारंपरिक संस्कृति की मजबूत मिसाल पेश की।
मुहर्रम में अनुशासन और कला का संगम, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अखाड़ों को मिला सम्मान
