संविदा कर्मियों के पोषण की चिंता के साथ सीएलडब्ल्यू लेबर यूनियन का निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर, 48 श्रमिकों की हुई जांच

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 12 जुलाई 2026 चित्तरंजन। चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (सीएलडब्ल्यू) लेबर यूनियन की ओर से रविवार को पूर्व महासचिव स्वर्गीय आलोक कुमार घोष की स्मृति में एक नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। श्रमिकों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय रहते बीमारियों की पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने भाग लिया। कुल 48 श्रमिकों ने अपना पंजीकरण कराकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया।शिविर में केजी अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कृष्ण भानु बनर्जी एवं डॉ. सुदीप्त महापात्रा ने अपनी सेवाएं स्वेच्छा से प्रदान कीं। दोनों चिकित्सकों ने श्रमिकों का सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण किया और आवश्यक परामर्श के साथ बेहतर खान-पान एवं नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी। चिकित्सकों के इस सामाजिक सहयोग की उपस्थित लोगों ने सराहना की।स्वास्थ्य शिविर को सफल बनाने में सीएलडब्ल्यू लेबर यूनियन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। पंजीकरण, जांच व्यवस्था और श्रमिकों के मार्गदर्शन से लेकर पूरे आयोजन के संचालन तक यूनियन के सदस्यों ने जिम्मेदारीपूर्वक अपनी भूमिका निभाई, जिससे शिविर शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।इस अवसर पर यूनियन के महासचिव राजीव गुप्ता ने कहा कि पिछले स्वास्थ्य शिविर के दौरान मिली चिकित्सकीय रिपोर्टों और अनुभवों से यह सामने आया था कि बड़ी संख्या में संविदा श्रमिक प्रोटीन, विटामिन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की कमी से जूझ रहे हैं। यह स्थिति केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।उन्होंने बताया कि इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए यूनियन ने संविदा कर्मियों को अंडे उपलब्ध कराने की योजना बनाई है, ताकि उनके दैनिक आहार में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाई जा सके और कुपोषण की समस्या को कुछ हद तक कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह पहल श्रमिकों के बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास है।राजीव गुप्ता ने क्षेत्र के सभी लोगों से इस सामाजिक अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि समाज के सक्षम लोगों को आगे आकर संविदा श्रमिकों के लिए सहयोग करना चाहिए। उन्होंने लोगों से स्वास्थ्य शिविरों में अधिक से अधिक भाग लेने और पोषण सामग्री उपलब्ध कराने के लिए योगदान देने का आग्रह किया। उनका कहना था कि सामूहिक सहयोग से ही श्रमिकों के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है और उन्हें बेहतर जीवन की ओर अग्रसर किया जा सकता है।

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