न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 27 अगस्त जामताड़ा। जामताड़ा सदर अस्पताल में पिछले आठ दिनों से अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा कर रहे दो लावारिस शवों को गुरुवार को आखिरकार मोक्ष मिला। कई दिनों तक शव अस्पताल में पड़े रहे, लेकिन उनके अंतिम संस्कार को लेकर जिम्मेदारी तय नहीं हो पाने के कारण मामला सरकारी प्रक्रिया में उलझा रहा। अस्पताल प्रबंधन और पुलिस प्रशासन के स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से दोनों शवों का अंतिम संस्कार नहीं हो सका था।मामले की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से जामताड़ा चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष संजय अग्रवाल को मिली। सूचना मिलते ही उन्होंने पहल करते हुए मानवता का परिचय दिया। गुरुवार को संजय अग्रवाल ने स्थानीय लोगों के सहयोग से दोनों लावारिस शवों को अजय नदी घाट पहुंचाया और अंतिम संस्कार कराया। इस पहल से उन मृतकों को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई मिल सकी, जिनके अपने लोग उनके अंतिम सफर में मौजूद नहीं थे।अंतिम संस्कार के दौरान संजय अग्रवाल ने जामताड़ा में लंबे समय से बंद पड़े विद्युत शवदाहगृह को लेकर चिंता और नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि शहर में शवों के अंतिम संस्कार की सुविधा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से वर्षों पहले विद्युत शवदाहगृह का निर्माण कराया गया था, लेकिन आज तक इसका नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका है। इसके कारण लोगों को अंतिम संस्कार के लिए कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।उन्होंने बताया कि विद्युत शवदाहगृह को चालू कराने की मांग को लेकर तत्कालीन उपायुक्त रवि आनंद और वर्तमान उपायुक्त आलोक कुमार को पत्र भी सौंपा जा चुका है। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।संजय अग्रवाल ने जिला प्रशासन से मांग की कि विद्युत शवदाहगृह को जल्द से जल्द चालू कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी शव के अंतिम संस्कार में प्रशासनिक पेंच या संसाधनों की कमी बाधा न बने और हर मृत व्यक्ति को सम्मानजनक अंतिम विदाई मिल सके।
सरकारी पेंच में अटकी दो जिंदगियों की आखिरी रस्म, संजय अग्रवाल ने बढ़ाया मदद का हाथ किया विद्युत शवदाहगृह को चालू कराने की मांग

