न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 4 अक्टूबर चित्तरंजन। रेलनगरी चित्तरंजन के स्ट्रीट नंबर-11 स्थित क्वार्टर नंबर 11बी के पूजा घर से 28 सितंबर को मिले नरकंकाल की पहचान और मौत का रहस्य एक सप्ताह बाद भी कायम है। पुलिस की जांच जारी है और फिलहाल पूरा मामला फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट पर टिका हुआ है। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद ही नरकंकाल से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।घटना के बाद से ही स्थानीय लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि व्यस्त हिल कॉलोनी क्षेत्र में इतने लंबे समय तक क्वार्टर के अंदर किसी शव के पड़े रहने की भनक आखिर कैसे नहीं लगी। वहीं, लापता व्यक्ति से जुड़ी पुरानी शिकायत और क्वार्टर की तलाशी नहीं लिए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।इसी मुद्दे को लेकर भाजपा चित्तरंजन के वरिष्ठ नेता शंकर तिवारी ने तत्कालीन सरकार, रेल प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना पुलिस को दी गई थी तो उसके संभावित ठिकानों और क्वार्टर की जांच क्यों नहीं की गई। उनका आरोप है कि वर्ष 2021 में व्यक्ति के लापता होने की बात सामने आती है, जबकि परिजनों की ओर से करीब दो वर्ष बाद थाने में सनहा दर्ज कराया गया।शंकर तिवारी ने यह भी सवाल उठाया कि सनहा दर्ज होने के बाद तलाश की कार्रवाई कितनी गंभीरता से की गई और इसी दौरान रेलवे की ओर से आश्रितों को मिलने वाली सुविधाएं कैसे उपलब्ध होती रहीं। उन्होंने पूरे मामले की गहन जांच की मांग करते हुए कहा कि कहीं यह नौकरी अथवा रेलवे की अन्य सुविधाओं से जुड़ा कोई पहलू तो नहीं है, इसकी भी जांच होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि मामले की कड़ियां पिछली सरकार के कार्यकाल तक जाती हैं। अब समय आ गया है कि निष्पक्ष जांच के जरिए इस रहस्य से पर्दा उठाया जाए।
नरकंकाल की गुत्थी बरकरार, एक सप्ताह बाद भी फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार; शंकर तिवारी ने उठाए कई सवाल

