न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 21 अक्टूबर जामताड़ा/मिहिजाम/चित्तरंजन। दुर्गा पूजा के समापन के साथ ही जामताड़ा, मिहिजाम और चित्तरंजन में बंगाली समुदाय की पारंपरिक विदाई रस्म सिंदूर खेला श्रद्धा, उल्लास और भावुकता के बीच संपन्न हुई। मां दुर्गा की विदाई से पहले महिलाओं ने परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार सिंदूर खेला में हिस्सा लिया और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख, समृद्धि, सौभाग्य तथा अखंड सुहाग की कामना की। उत्सव के रंगों के बीच मां को विदा करने का क्षण आते ही वातावरण भावुक हो उठा।बंगाली संस्कृति में सिंदूर खेला का विशेष धार्मिक और सामाजिक महत्व है। इस परंपरा में विवाहित महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर उनके माथे और चरणों में श्रद्धा निवेदित करती हैं। इसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मां के प्रति अपनी आस्था प्रकट करती हैं। लाल सिंदूर से सजे चेहरे और पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित महिलाओं की मौजूदगी ने पूजा मंडपों को खास रंग प्रदान किया। महिलाओं ने मां दुर्गा से परिवार की खुशहाली, सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।जामताड़ा, मिहिजाम और रेलनगरी चित्तरंजन के विभिन्न पूजा पंडालों में विजयादशमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद लोगों ने एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। सिंदूर खेला के दौरान महिलाओं में उत्साह देखते ही बना, लेकिन विदाई की घड़ी नजदीक आते ही खुशी के बीच बिछड़ने का दर्द भी साफ झलकने लगा।मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के लिए ले जाने की तैयारी के बीच श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर आगमन की प्रार्थना की। ‘आसछे बोछोर आबार होबे’ अर्थात अगले वर्ष फिर होगा, के भाव के साथ भक्तों ने मां को विदा किया।इस तरह सिंदूर खेला ने एक बार फिर बंगाली समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारिवारिक एकजुटता और मां दुर्गा के प्रति अटूट आस्था को जीवंत कर दिया। विदाई के इस भावुक पल में हर भक्त की आंखों में यही उम्मीद थी कि मां अगले वर्ष फिर आएंगी और अपने आशीर्वाद से सबका जीवन खुशियों से भर देंगी।
सिंदूर खेला में छलका बंगाली महिलाओं का प्रेम, नम आंखों से मां दुर्गा को दी विदाई
