जामताड़ा महाविद्यालय में बंगला विभाग पर संकट के बादल, बंगाली संगठनों में बढ़ी नाराजगी; आंदोलन की चेतावनी

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 20 मई 2026 जामताड़ा। जामताड़ा महाविद्यालय में बंगला विभाग को बंद किए जाने की आशंका ने जिले के बंगाली समाज और भाषा प्रेमियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। इस खबर के सामने आने के बाद विभिन्न बंगाली संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है और इसे बंगला भाषा एवं संस्कृति के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है। हालांकि कॉलेज प्रशासन की ओर से अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत कम छात्र संख्या वाले विभागों को बंद करने की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।जानकारी के अनुसार, महाविद्यालय प्रशासन से इस विषय पर बातचीत के दौरान बताया गया कि केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति में कम नामांकन वाले विभागों की समीक्षा कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से बंद करने का प्रावधान रखा गया है। वर्तमान में जामताड़ा महाविद्यालय के बंगला विभाग में केवल एक प्राध्यापक पद कार्यरत है, जबकि विभाग में मात्र दो छात्र अध्ययनरत हैं। इसी वजह से विभाग के भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।इस मुद्दे पर झारखंड बंगाली समिति, जामताड़ा शाखा के जिला अध्यक्ष डॉ. दुर्गा दास भंडारी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि झारखंड में लंबे समय से विभिन्न बंगाली संगठन बंगला भाषा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में कार्य कर रहे हैं। बंगला अकादमी के गठन से लेकर किंडरगार्टन से स्नातकोत्तर स्तर तक बंगला शिक्षा को बढ़ावा देने की मांग लगातार उठाई जाती रही है।डॉ. भंडारी ने कहा कि जामताड़ा जिले में बड़ी संख्या में बंगाली समुदाय के लोग निवास करते हैं, बावजूद इसके भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए अपेक्षित पहल नहीं हो रही है। ऐसे समय में यदि बंगला विभाग को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाया जाता है तो यह स्थानीय बंगाली समाज की भावनाओं को आहत करेगा।उन्होंने झारखंड के सभी बंगाली संगठनों और समाज के लोगों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि बंगला विभाग को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि विभाग को बंद करने का निर्णय लिया जाता है तो संगठन की ओर से व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।फिलहाल यह मुद्दा जामताड़ा में भाषा, शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी बहस का प्रमुख विषय बन गया है।

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