झारखंड में बंगला भाषा के संरक्षण को लेकर ऑनलाइन मंथन, मातृभाषा के सम्मान और नई पीढ़ी में जागरूकता पर जोर

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 12 मई 2026 धनबाद। झारखंड में बंगला भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सोमवार रात एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। झारखंड बंगला भाषी उन्नयन समिति की ओर से गूगल मीट के माध्यम से आयोजित इस विचार-विमर्श कार्यक्रम में भाषा के संरक्षण, उसके प्रचार-प्रसार और नई पीढ़ी को मातृभाषा से जोड़ने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।बैठक रात करीब नौ बजे शुरू हुई, जिसमें समिति से जुड़े कई सदस्यों ने भाग लिया। चर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बंगला केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि यह समाज की संस्कृति, इतिहास और भावनात्मक पहचान का प्रतीक है। इसलिए इसके संरक्षण और सम्मान के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं।बैठक में शिक्षा व्यवस्था में बंगला भाषा की भूमिका को लेकर भी गंभीरता से विचार किया गया। सदस्यों ने कहा कि स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में बंगला भाषा को उचित महत्व मिलना चाहिए, ताकि बच्चों में अपनी मातृभाषा के प्रति जुड़ाव बना रहे। नई पीढ़ी में बंगला पढ़ने-लिखने की आदत को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक आयोजन और भाषा आधारित गतिविधियां आयोजित करने पर भी सहमति बनी।इसके अलावा जनगणना में मातृभाषा के रूप में बंगला का सही उल्लेख सुनिश्चित करने को लेकर जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि कई लोग जानकारी के अभाव में अपनी मातृभाषा दर्ज नहीं कराते, जिससे भाषा की वास्तविक स्थिति प्रभावित होती है। इसलिए समाज के हर वर्ग तक जागरूकता पहुंचाना आवश्यक है।बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि झारखंड में बंगला साहित्य, लोक संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों को संरक्षित करने के लिए आने वाले दिनों में विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। समिति के सदस्यों ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि बंगला भाषा की गरिमा और पहचान को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास जारी रहेंगे।कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि भाषा किसी भी समाज की आत्मा होती है और मातृभाषा से जुड़ाव ही सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखता है। इसी सोच के साथ झारखंड में बंगला भाषा और संस्कृति को आगे बढ़ाने की दिशा में सामूहिक अभियान चलाया जाएगा।

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