न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 24 मई 2026 जामताड़ा। जामताड़ा सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मिहिजाम थाना क्षेत्र के केलाही गांव की रहने वाली पांच माह की गर्भवती महिला प्रीति हांसदा को अचानक तबीयत बिगड़ने और रक्तस्राव शुरू होने के बाद शनिवार रात इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि पूरी रात उन्हें डॉक्टर का इंतजार करना पड़ा और समय पर उपचार नहीं मिल सका।जानकारी के अनुसार, शनिवार रात करीब 10 बजे महिला की तबीयत अचानक खराब हुई और तेज ब्लीडिंग शुरू हो गई। घबराए परिजन तत्काल उन्हें जामताड़ा सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में पंजीकरण कराने के बाद महिला को भर्ती कर बेड उपलब्ध कराया गया, लेकिन इसके बाद भी इलाज शुरू नहीं हो सका।परिजनों का कहना है कि रातभर उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों से डॉक्टर बुलाने की गुहार लगाई, लेकिन कोई चिकित्सक जांच के लिए नहीं पहुंचे। उनका आरोप है कि अस्पताल में उस समय कोई महिला चिकित्सक उपलब्ध नहीं थी। वहीं मौजूद एएनएम और जीएनएम भी डॉक्टर के निर्देश के अभाव में दवा या अन्य चिकित्सा प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकीं।रातभर महिला की स्थिति बिगड़ती रही और रक्तस्राव जारी रहा। परिवार वालों के मुताबिक सुबह लगभग सात बजे तक भी चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलने पर उन्होंने महिला को अस्पताल से निकालकर मिहिजाम के एक निजी क्लीनिक में भर्ती कराया। वहां चिकित्सकीय जांच के बाद गर्भपात कराना पड़ा। वर्तमान में महिला का इलाज जारी है और उसकी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है।मामले को लेकर समाजसेवी आकिब जावेद खान और समानत मरांडी ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित उपचार मिलता तो गर्भस्थ शिशु को बचाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि अस्पताल में चिकित्सकों की अनुपस्थिति गंभीर चिंता का विषय है और इससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है।इधर, मामले पर सिविल सर्जन शिव प्रसाद मिश्र ने कहा कि घटना की जानकारी मिली है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल की व्यवस्था और ड्यूटी प्रणाली की भी समीक्षा की जाएगी।
रातभर इलाज को तरसती रही गर्भवती, डॉक्टर के इंतजार में बीती रात; सुबह निजी क्लीनिक में कराना पड़ा गर्भपात
