रवीन्द्र–नजरुल सांस्कृतिक संध्या में सजी कला और साहित्य की सुरमयी महफिल, विरासत को संजोने का दिया संदेश

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 28 जून 2026 चित्तरंजन। रेलनगरी चित्तरंजन के श्रीलता इंस्टीट्यूट ऑडिटोरियम में रविवार की शाम कला, साहित्य और संगीत के रंगों से सराबोर रही। संस्थान की ओर से आयोजित ‘रवीन्द्र–नजरुल सांस्कृतिक संध्या’ में कविगुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर और विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, कलाकार, विद्यार्थी और शहर के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ दोनों महान साहित्यकारों के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद स्थानीय कलाकारों ने रवीन्द्र संगीत, नजरुल गीति, समूह नृत्य तथा आवृत्ति (कविता पाठ) की मनमोहक प्रस्तुतियों से पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों की प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।इस अवसर पर श्रीलता इंस्टीट्यूट के सचिव गौतम श्रीमानी ने कहा कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर और काजी नजरुल इस्लाम केवल महान कवि ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों के ऐसे प्रकाश स्तंभ हैं, जिनकी रचनाएं आज भी समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इन दोनों महापुरुषों के साहित्य में प्रेम, मानवता, समानता, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।उन्होंने आगे कहा कि तेजी से बदलते समय में नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना बेहद आवश्यक है। ऐसे आयोजन युवाओं को साहित्य, संगीत और कला के प्रति प्रेरित करने के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीलता इंस्टीट्यूट भविष्य में भी इसी प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा, ताकि समाज में रचनात्मक सोच और सांस्कृतिक चेतना को निरंतर बढ़ावा मिलता रहे।कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने अपनी सधी हुई प्रस्तुतियों से दोनों महान साहित्यकारों की रचनाओं को जीवंत कर दिया। पूरे आयोजन में अनुशासन, सौहार्द और सांस्कृतिक गरिमा की झलक देखने को मिली। समापन पर आयोजकों ने सभी कलाकारों, अतिथियों और दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य और संस्कृति समाज को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम हैं तथा इन्हें जीवंत बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

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