न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 2 जुलाई 2026 चित्तरंजन। चित्तरंजन रेल इंजन कारखाना (सीएलडब्ल्यू) में एक्ट अप्रेंटिस भर्ती को लेकर उठे विवाद ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीएलडब्ल्यू टेक्निकल ट्रेनिंग सेंटर ने फिटर और इलेक्ट्रीशियन ट्रेड के 19 एक्ट अप्रेंटिस की प्रशिक्षण अवधि बीच में ही समाप्त करने का आदेश जारी किया है। 1 जुलाई को जारी इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित प्रशिक्षुओं को 30 जून के बाद प्रशिक्षण जारी रखने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, आदेश में इस कठोर निर्णय के पीछे का कारण नहीं बताया गया, जिससे पूरे मामले को लेकर संशय और बढ़ गया है।बताया गया है कि सभी प्रभावित प्रशिक्षु TS/157/Act Apprentice 3/12/2025 Batch के तहत चयनित हुए थे। आदेश में केवल नाम, अभिभावक और ट्रेड का उल्लेख है, लेकिन चयन रद्द करने का आधार सार्वजनिक नहीं किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि चयन प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई थी तो उसकी जिम्मेदारी केवल प्रशिक्षुओं की है या उन अधिकारियों की भी, जिन्होंने दस्तावेजों की जांच कर अंतिम चयन सूची तैयार की।सीआरएमसी नेता इंद्रजीत सिंह ने आरोप लगाया कि सीएलडब्ल्यू में अप्रेंटिसशिप दिलाने के नाम पर लंबे समय से कथित रूप से एक संगठित गिरोह सक्रिय है। उनका दावा है कि कुछ अभ्यर्थियों के अंकपत्रों में कथित हेराफेरी कर उन्हें चयनित कराया गया। आरोप यह भी है कि अंकों की संख्या बदल दी गई, लेकिन शब्दों में लिखे अंक पुराने ही रह गए। बाद में दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान यह विरोधाभास सामने आने पर मामला उजागर हुआ।यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह केवल फर्जी दस्तावेजों का मामला नहीं, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि चयन के समय दस्तावेजों की सही तरीके से जांच होती तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। उनका सवाल है कि जब चयन प्रक्रिया कई स्तरों की जांच के बाद पूरी होती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं की जा रही है।लोगों का मानना है कि केवल प्रशिक्षुओं को हटा देना पर्याप्त नहीं है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या नियमों की अनदेखी हुई है तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध भी कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।फिलहाल रेलवे प्रशासन ने पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। ऐसे में अब सबकी नजर संभावित जांच और इस बात पर टिकी है कि क्या कार्रवाई केवल 19 अप्रेंटिस तक सीमित रहेगी या फिर चयन प्रक्रिया में शामिल जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
भर्ती में गड़बड़ी के बाद बड़ा सवाल: सिर्फ 19 अप्रेंटिस पर कार्रवाई क्यों, चयन करने वाले अधिकारियों पर कब गिरेगी गाज?
