नई सड़क के किनारे केबल बिछाने पर विवाद, स्थानीय लोगों ने लगाया सड़क को नुकसान पहुंचाने का आरोप

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल मित्रा 18 जुलाई 2026 सालानपुर। पश्चिम बंगाल के सालानपुर प्रखंड अंतर्गत आमडांगा मोड़ क्षेत्र में एक निजी कंपनी द्वारा ऑप्टिकल फाइबर (ओएफसी) केबल बिछाने का कार्य विवादों में घिर गया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कंपनी सड़क निर्माण से जुड़े निर्धारित मानकों की अनदेखी करते हुए नई बनी सड़क के बिल्कुल किनारे भारी ड्रिल मशीन से खुदाई कर रही है, जिससे सड़क की मजबूती प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।ग्रामीणों का कहना है कि हाल ही में बनी पक्की सड़क के किनारे बड़े आकार की ड्रिल मशीन से गहरे गड्ढे किए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार सड़क से सुरक्षित दूरी बनाए रखकर केबल बिछाने का कार्य किया जाना चाहिए, लेकिन संबंधित कंपनी नियमों की अनदेखी करते हुए सड़क से सटाकर खुदाई कर रही है। इससे सड़क के कमजोर होने और भविष्य में उसके क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ गई है।स्थानीय लोगों ने यह भी चिंता जताई कि बरसात के मौसम में सड़क किनारे किए गए गड्ढों के कारण मिट्टी धंस सकती है। ऐसे में भारी वाहन या अन्य गाड़ियां गुजरने के दौरान सड़क का किनारा टूट सकता है, जिससे गंभीर सड़क दुर्घटनाएं होने का खतरा बना रहेगा। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक सुविधा के लिए बनाई गई सड़क को निजी कार्यों के लिए नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन भी सक्रिय हुआ। शिकायत मिलने पर प्रखंड प्रशासन ने पुलिस को मौके पर भेजकर फिलहाल कार्य रुकवाने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित कंपनी के पास कार्य करने की वैध अनुमति है या नहीं तथा निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।गौरतलब है कि कुछ माह पहले ही रूपनारायणपुर के आमडांगा मोड़ से गौरांडी तक नई डामर सड़क का निर्माण कराया गया था। उस समय भी सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे। अब सड़क के किनारे इस तरह की खुदाई शुरू होने से स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते नियमों के अनुरूप कार्य नहीं कराया गया, तो नई सड़क को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद संबंधित एजेंसी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है और सड़क की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन कौन से कदम उठाता है।

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