न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 6 सितंबर चित्तरंजन। रेलवे आवासों के बेहतर उपयोग और लंबे समय से खाली पड़े क्वार्टरों को व्यवस्थित करने की मांग को लेकर नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (NFIR) ने रेलवे बोर्ड का ध्यान आकृष्ट कराया है। संगठन के महासचिव डॉ. एम. राघवैया ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ को पत्र भेजकर खाली आवासों के उपयोग के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव दिया है।पत्र में चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (CLW) की आवासीय व्यवस्था का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि यहां करीब 9,300 रेलवे क्वार्टर उपलब्ध हैं, जबकि लगभग 2,000 आवास लंबे समय से खाली पड़े हैं। दूसरी ओर, संस्थान में करीब 7,500 कर्मचारी कार्यरत हैं। NFIR का कहना है कि बड़ी संख्या में आवासों के निष्क्रिय पड़े रहने से रेलवे की महत्वपूर्ण संपत्ति का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है।संगठन के अनुसार, वर्षों से बंद पड़े क्वार्टरों का नियमित रखरखाव नहीं होने के कारण उनकी स्थिति लगातार खराब हो रही है। ऐसे आवासों पर अवैध कब्जे की आशंका भी बनी रहती है। इससे रेलवे को संपत्ति के क्षरण के साथ-साथ सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है।NFIR ने सुझाव दिया है कि खाली क्वार्टरों के आवंटन में सबसे पहले वर्तमान रेल कर्मचारियों की आवासीय जरूरतों को पूरा किया जाए। इसके बाद उपलब्ध अतिरिक्त आवासों को सेवानिवृत्त रेलकर्मियों, अधिकृत दुकानदारों, अप्रेंटिस व प्रशिक्षुओं तथा रेलवे से जुड़े ठेका श्रमिकों को निर्धारित अवधि के लिए लाइसेंस के आधार पर देने पर विचार किया जाए।संघ ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि रेलवे प्रशासन और मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधियों की संयुक्त टीम गठित कर 12 महीने से अधिक समय से खाली पड़े क्वार्टरों की सूची तैयार की जाए। NFIR का मानना है कि ऐसी नीति लागू होने से रेलवे को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, रेलवे कॉलोनियों की निगरानी एवं सुरक्षा मजबूत होगी और लंबे समय से अनुपयोगी सरकारी संपत्तियों को बर्बाद होने से बचाया जा सकेगा।
खाली रेलवे क्वार्टरों पर NFIR की पहल, चित्तरंजन में पारदर्शी आवंटन नीति की मांग

