न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 6 नवंबर मिहिजाम। चंद्रदीपा स्थित जात्रा मैदान शुक्रवार को आदिवासी परंपरा, सामाजिक एकजुटता और ग्राम स्वशासन की भावना का साक्षी बना। यहां ओंकार सेवा संस्थान, मिहिजाम के तत्वावधान में वार्षिक मिलन समारोह का आयोजन किया गया। छह नवंबर को सुबह 10 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में छह पंचायतों के मुखिया और 25 गांवों से पहुंचे परंपरागत आदिवासी लीडरों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आयोजन ग्लोबल ग्रीन ग्रांट फंड परियोजना के अंतर्गत किया गया।समारोह का मुख्य आकर्षण आदिवासी समाज के पारंपरिक नेतृत्वकर्ताओं का सम्मान रहा। इस दौरान विभिन्न गांवों से आए मांझी हड़ामों को आदिवासी रीति-रिवाज और परंपराओं के अनुरूप सम्मानित किया गया। आयोजन के माध्यम से पारंपरिक व्यवस्था को सम्मान देने के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर सामाजिक नेतृत्व को मजबूत करने का संदेश दिया गया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओंकार सेवा संस्थान की अध्यक्ष रितु देवी ने संस्था की ओर से संचालित गतिविधियों और ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने ग्रामीणों को संस्था के उद्देश्यों और सामाजिक विकास से जुड़े प्रयासों से अवगत कराया।वहीं, समारोह में पेसा (PESA) कानून के तहत ग्राम सभा की भूमिका और पारंपरिक नेतृत्व के अधिकारों पर भी चर्चा हुई। जानकारी के अनुसार, पंचायत के मुखिया की ओर से परंपरागत लीडरों को ग्राम सभा का अधिकार देते हुए अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। इसे आदिवासी परंपरागत स्वशासन व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया।इस अवसर पर संस्था के सचिव श्याम सुंदर हाजरा सहित ओंकार सेवा संस्थान के सभी कार्यकर्ता मौजूद रहे। समारोह ने विभिन्न गांवों के पारंपरिक प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर आपसी संवाद और एकजुटता को बढ़ावा दिया। कार्यक्रम में मुखिया संघ के अध्यक्ष सह चन्द्रदीपा पंचायत के मुखिया देवीषण हांसदा के अलावा अन्य पंचायतों के मुखिया एवं मांझी हड़ाम शामिल हुए।
पेसा कानून के तहत ग्राम सभा की कमान परंपरागत लीडरों को, 25 गांवों के मांझी हड़ाम हुए सम्मानित
