सदी पुराना सहारा टूटा: जामताड़ा स्टेशन का ऐतिहासिक फुटओवर ब्रिज अब सिर्फ यादों में

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 17 मई 2026 जामताड़ा। जामताड़ा रेलवे स्टेशन की पहचान बन चुका लगभग सौ वर्ष पुराना फुटओवर ब्रिज आखिरकार इतिहास बन गया। वर्षों तक हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने वाला यह पुल रविवार को रेलवे प्रशासन की कार्रवाई में पूरी तरह हटा दिया गया। लंबे समय से जर्जर घोषित किए जाने के बाद इस पर पहले ही आवाजाही रोक दी गई थी, लेकिन इसके ढहने के साथ शहरवासियों की भावनात्मक स्मृतियां भी मानो मलबे में दब गईं।एक समय ऐसा था जब यह फुटओवर ब्रिज जामताड़ा शहर की “लाइफ लाइन” माना जाता था। स्टेशन के दोनों ओर बसे इलाकों को जोड़ने वाला यह पुल लोगों के लिए सबसे आसान रास्ता हुआ करता था। जामताड़ा महाविद्यालय, थाना, न्यायालय और थाना रोड की ओर जाने वाले छात्र, कर्मचारी, दुकानदार और आम नागरिक प्रतिदिन इसी पुल का उपयोग करते थे। बाजार तक पहुंचने के लिए भी यह सबसे छोटा और सुविधाजनक मार्ग माना जाता था।रेलवे सूत्रों के अनुसार, आसनसोल रेल मंडल के अधीन आने वाले इस पुराने पुल को सुरक्षा कारणों से हटाने का निर्णय लिया गया था। रविवार को सिग्नल एवं डीआरआई ब्रिज विभाग की निगरानी में तकनीकी टीम ने पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया। पुल हटाने के लिए दो भारी-भरकम डीजल क्रेन तैनात की गईं। अधिकारियों की मौजूदगी में महज दस मिनट के भीतर पूरे ढांचे को सुरक्षित तरीके से जमीन पर उतार लिया गया।कार्रवाई के दौरान रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। हाईटेंशन बिजली तारों को हटाने के लिए चार टावर वैगन लगाए गए। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पहले ही स्टेशन परिसर को यात्रियों से खाली करा लिया गया था। पूरी प्रक्रिया तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में सावधानीपूर्वक संपन्न हुई।मौके पर स्टेशन प्रबंधक एस.के. पासवान, आरपीएफ जवान, रेलवे कर्मी और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। पुल हटने के बाद कई बुजुर्गों और स्थानीय लोगों ने पुरानी यादों को साझा करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि शहर के इतिहास और लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा था।आधुनिक रेलवे सुविधाओं और विकास कार्यों के बीच अब जामताड़ा का यह ऐतिहासिक फुटओवर ब्रिज केवल तस्वीरों और यादों में ही जीवित रहेगा।

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