न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल मित्रा 9 अगस्त आसनसोल। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को आसनसोल के रवींद्र भवन में भव्य एवं रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर आदिवासी समाज के लोगों की भीड़ जुटने लगी। पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने पारंपरिक परिधान और सांस्कृतिक वेशभूषा में पहुंचकर पूरे परिसर को आदिवासी संस्कृति के विविध रंगों से भर दिया।कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा, भाषा, धर्म और सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समुदाय की पहचान केवल उसकी परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के साथ उसका गहरा और सदियों पुराना रिश्ता भी उसकी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।वक्ताओं ने ‘जल, जंगल और जमीन’ की सुरक्षा को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर आदिवासी समुदाय की निर्भरता केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि उनकी जीवनशैली और अस्तित्व से जुड़ी हुई है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी अधिकारों को साथ लेकर चलना जरूरी है।विचार-विमर्श के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर शुरू हुआ। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन, लोकगीत और मनमोहक आदिवासी नृत्य ने पूरे रवींद्र भवन को उत्साह से भर दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शक भी तालियों और उत्साह के साथ उनका हौसला बढ़ाते नजर आए।आयोजकों ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य आदिवासी समाज के अधिकारों, अस्तित्व, भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है।कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पाल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। आयोजन को लेकर आदिवासी समाज के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
रवींद्र भवन में गूंजे आदिवासी संस्कृति के रंग, विश्व आदिवासी दिवस पर उमड़ा जनसैलाब
