न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 6 अक्टूबर जामताड़ा। जिले में ग्रामीण सड़कों के सुदृढ़ीकरण और मरम्मतीकरण के नाम पर योजनाएं स्वीकृत होने के बावजूद धरातल पर काम शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीण कार्य विभाग, झारखंड रांची की मुख्यमंत्री ग्राम सड़क सुदृढ़ीकरण योजना के तहत जिले की सात महत्वपूर्ण सड़कों को एक पैकेज में शामिल कर एक ही एजेंसी से काम कराने की तैयारी की गई थी। इन योजनाओं को वर्ष 2024 में तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृति भी मिल चुकी है, लेकिन करीब दो वर्ष बाद भी मरम्मतीकरण शुरू नहीं हो सका है।पैकेज में कालाझरिया-नवाडीह वाया सलैया पांच किमी, अमोई रेलवे ब्रिज-कलाही मोड़ 4.6 किमी, बंदाजोरी-भलगढ़ा 3.24 किमी, मिहिजाम-केवटजाली 1.8 किमी, चंपापुर-दिवान मोड़ 3.3 किमी, लखनपुर मोड़-बोड़वा पल्टा होते हुए सबनपुर 9.35 किमी तथा पतरोडीह पीडब्ल्यूडी पथ-सिकरपोसनी मोड़ 2.3 किमी सड़क शामिल हैं।सबसे गंभीर स्थिति अमोई रेलवे ब्रिज से कलाही मोड़ तक की सड़क की है। इसका विशेष मरम्मतीकरण कार्य तत्कालीन ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री तथा स्थानीय विधायक डॉ इरफान अंसारी ने 18 अगस्त 2024 को शिलान्यास किया था। बावजूद इसके आज तक सड़क पर एक इंच भी मरम्मतीकरण नहीं हुआ।विभागीय सूत्रों के अनुसार योजनाओं को तकनीकी एवं वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी हुई और संवेदकों के दस्तावेज मुख्य अभियंता कार्यालय में जमा हैं। कार्य आवंटन का निर्णय अब तक नहीं हो सका है। सवाल यह है कि स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद काम आखिर क्यों अटका है?जर्जर सड़कों से रोजाना गुजरने वाले ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल शिलान्यास तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विधायक को भी योजनाओं की प्रगति की नियमित निगरानी करनी चाहिए। वहीं मुख्य अभियंता स्तर पर लंबित कार्य आवंटन ने विभागीय कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिलान्यास के दो साल बाद भी सड़कें जस की तस, विधायक-मंत्री और विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
