माइथन में फ्लोटिंग सोलर परियोजना के खिलाफ उभरी आवाज, 40 गांवों के लोगों ने कहा—‘जल, जंगल, जमीन पर हमारा अधिकार’

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल मित्रा 15 सितंबर माइथन। प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर परियोजना को लेकर माइथन इलाके में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। कालीपाथर मैदान में 22 मौजा के करीब 40 गांवों के लोग एकत्र हुए। दामोदर वैली विस्थापित संघर्ष समिति और ल महल व खेरवाल महल के संयुक्त बैनर तले आयोजित जनसभा में विस्थापित परिवारों के साथ बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोगों ने हिस्सा लिया।सभा के दौरान पूरा मैदान ‘जल, जंगल, जमीन हमारा अधिकार है’ जैसे नारों से गूंज उठा। लोगों ने प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर परियोजना को रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि विकास के नाम पर स्थानीय लोगों के पारंपरिक अधिकार और आजीविका से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।आंदोलनकारियों का कहना है कि माइथन बांध के निर्माण के दौरान पहले ही बड़ी संख्या में परिवार अपनी जमीन और घर से विस्थापित हुए थे। उनके मुताबिक, वर्षों गुजर जाने के बावजूद कई विस्थापित परिवारों को समुचित पुनर्वास और स्थायी रोजगार का लाभ नहीं मिल सका है। ऐसे में अब जलाशय के ऊपर सौर ऊर्जा परियोजना शुरू किए जाने की योजना ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।सभा में वक्ताओं ने आशंका जताई कि जलाशय पर बड़े पैमाने पर सोलर पैनल लगाए जाने से जलीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है। इसके साथ ही मछुआरों और जलाशय पर निर्भर स्थानीय लोगों की आजीविका पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है।जनसभा को बसुदेव महतो, सुरेश सोरेन, परेश मरांडी, अकबर अंसारी समेत अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। उन्होंने विस्थापित परिवारों के लंबित पुनर्वास, रोजगार और स्थानीय लोगों के पारंपरिक अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग उठाई।आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया और परियोजना वापस नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *