शौचालय निर्माण के टेंडर पर राकेश लाल ने उठाए सवाल, एसडीओ ने कहा- जांच के लिए जारी होगा पत्र

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 4 नवंबर मिहिजाम। मिहिजाम नगर परिषद में दो सामुदायिक शौचालयों के निर्माण को लेकर जारी निविदा प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में आ गई है। निविदा प्रकाशित होने के बाद जारी संशोधन सूचना में संवेदकों से साइट वेरिफिकेशन रिपोर्ट मांगे जाने और रिपोर्ट जारी करने से पहले संवेदक से ही जियोटैग तस्वीर तथा संतुष्टि संबंधी लिखित प्रमाण मांगने के मामले ने विवाद खड़ा कर दिया है। इस पूरी प्रक्रिया पर जनसेवा पार्टी के संयोजक राकेश लाल ने नगर परिषद की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए निविदा पर तत्काल रोक लगाने और पारदर्शी तरीके से दोबारा टेंडर जारी करने की मांग की है। वहीं, अनुमंडल पदाधिकारी ने मामले की शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए जांच के लिए कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र जारी करने की बात कही है।मामला नगर परिषद कार्यालय द्वारा 26 अक्टूबर 2026 को जारी आमंत्रण निविदा सूचना (एनआईटी संख्या 06/2026-27) से जुड़ा है। इसके तहत कुल 28 लाख 11 हजार 509 रुपये की लागत से दो नौ-सीटर सामुदायिक शौचालयों का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें एक शौचालय हटिया परिसर में बनाया जाना है, जबकि दूसरे के लिए मिहिजाम नगर परिषद क्षेत्र में स्थान निर्धारित किए बिना निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है। दोनों कार्यों के ई-टेंडर रेफरेंस नंबर क्रमशः Npm/f2/2026-27/02 और Npm/f2/2026-27/03 हैं। ऑनलाइन निविदा जमा करने की अवधि 30 अक्टूबर से 6 नवंबर सुबह 11 बजे तक निर्धारित की गई है, जबकि निविदा खोलने की तिथि 7 नवंबर सुबह 11 बजे रखी गई है।इसी बीच 30 अक्टूबर को नगर परिषद की ओर से एक संशोधन सूचना (कॉरिजेंडम) जारी की गई, जिसमें निविदा में भाग लेने वाले संवेदकों से साइट वेरिफिकेशन रिपोर्ट प्रस्तुत करने की शर्त सामने आई। इसके बाद पाल बागान स्थित एलाइट कंस्ट्रक्शन की ओर से 2 नवंबर को कार्यपालक पदाधिकारी को आवेदन देकर साइट वेरिफिकेशन रिपोर्ट जारी करने का अनुरोध किया गया।इसके जवाब में 3 नवंबर को नगर परिषद कार्यालय ने कंपनी को पत्र भेजकर संबंधित स्थल के जियोटैग फोटो अविलंब उपलब्ध कराने और लिखित रूप से यह प्रमाणित करने को कहा कि संवेदक स्वयं साइट वेरिफिकेशन से संतुष्ट है। पत्र में स्पष्ट किया गया कि इन औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद ही कार्यालय की ओर से साइट वेरिफिकेशन रिपोर्ट निर्गत की जाएगी।इस घटनाक्रम ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माण स्थल का चयन करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या नगर परिषद के अधिकृत अभियंता और तकनीकी अधिकारियों को स्थल का निरीक्षण कर उसकी पुष्टि नहीं करनी चाहिए? यदि निर्माण स्थल पहले से निर्धारित था तो निविदा जारी करने से पूर्व उसका सत्यापन क्यों नहीं कराया गया? वहीं, दूसरे शौचालय के लिए स्थान स्पष्ट नहीं होने की स्थिति में संवेदकों से साइट वेरिफिकेशन की अपेक्षा कितनी उचित है?इन्हीं सवालों को लेकर एलाइट कंस्ट्रक्शन के प्रतिनिधियों ने जनसेवा पार्टी के संयोजक राकेश लाल से मुलाकात की। इसके बाद प्रेस वार्ता आयोजित कर राकेश लाल ने पूरी प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि निविदा प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें सभी संवेदकों को समान अवसर मिले और किसी प्रकार की अस्पष्टता न रहे। उन्होंने मांग की कि वर्तमान निविदा प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाकर आवश्यक संशोधन किए जाएं और स्पष्ट शर्तों के साथ नए सिरे से निविदा आमंत्रित की जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।राकेश लाल ने नगर परिषद क्षेत्र में पहले से निर्मित सामुदायिक शौचालयों की उपयोगिता पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि विभिन्न वार्डों में आधा दर्जन से अधिक सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं, लेकिन कई वर्षों बाद भी उनमें से अधिकांश का समुचित उपयोग नहीं हो रहा है। रखरखाव के अभाव में कई शौचालय जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। ऐसे में नए निर्माण पर राशि खर्च करने से पहले पुराने शौचालयों को दुरुस्त कर उपयोग योग्य बनाना प्राथमिकता होनी चाहिए।इस मामले में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी से फोन पर संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। हालांकि, उन्होंने फोन पर प्रतिक्रिया देने के बजाय कार्यालय आकर पक्ष लेने की बात कही।उधर, अनुमंडल पदाधिकारी ने बताया कि इस संबंध में शिकायत उनके पास भी पहुंची है। कार्यपालक पदाधिकारी से उनकी बातचीत हुई है और मामले के तथ्यों की जानकारी लेने के लिए पत्र जारी किया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर जिले के उपायुक्त को भी पूरे प्रकरण से अवगत कराया जाएगा। अब देखना होगा कि प्रशासन इस निविदा प्रक्रिया में उठे सवालों पर क्या कदम उठाता है और संवेदकों की आशंकाओं का समाधान किस प्रकार किया जाता है।

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