जामताड़ा में छात्रों का ‘न्याय मार्च’, जंतर-मंतर कार्रवाई और कथित NEET पेपर लीक के विरोध में शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 23 जुलाई 2026 जामताड़ा। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई और NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक के विरोध में गुरुवार को जामताड़ा में छात्रों और युवाओं ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। जामताड़ा युवा मंच के बैनर तले आयोजित ‘न्याय मार्च’ में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों की रक्षा की मांग बुलंद की गई।मार्च की शुरुआत गांधी मैदान से हुई। इसके बाद प्रदर्शनकारी सुभाष चौक, मुख्य बाजार सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए इंदिरा चौक पहुंचे। यहां प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पूरे मार्च के दौरान “छात्रों को न्याय दो”, “पेपर लीक पर रोक लगाओ”, “शिक्षा बचाओ, भविष्य बचाओ” और “लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करो” जैसे नारों से शहर गूंज उठा। मुख्य बाजार से गुजरते समय बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी प्रदर्शन देखने के लिए रुक गए।मीडिया से बातचीत में जसीम अंसारी ने कहा कि यह मार्च उन छात्रों के समर्थन में निकाला गया है जो निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और अपने अधिकारों की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की मांग भी उठाई।रिजवान शेख ने कहा कि कथित पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि जामताड़ा के युवाओं का यह प्रदर्शन देशभर के छात्रों के साथ एकजुटता का संदेश है। वहीं हाफिज नाजीर हुसैन ने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। अकबर अंसारी ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।प्रदर्शन के समापन पर जामताड़ा युवा मंच ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शी व्यवस्था लागू करने, कथित पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई तथा छात्र आंदोलनों में बल प्रयोग के बजाय संवाद की नीति अपनाने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।इस अवसर पर अरबाज खान, आशीदुल इजहारुल अंसारी, शमशेर आलम, जाबेद अंसारी, पुष्पा मरांडी, राजा अंसारी, जाहिद अंसारी, सिराज अंसारी, सुफियान कुरैशी, माजेश हेमब्रम, मेराज अंसारी, सुरेश सोरेन, मानिक मिर्धा, सादिक अंसारी, राहुल दास, विक्रांत दास, पुष्पा मुर्मू, सुहागिनी टुडू, सीमा सोरेन, सुबोदी हेमब्रम और निरोधी हेमब्रम सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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