मैथन जलाशय में फ्लोटिंग सोलर परियोजना पर बढ़ा बवाल, सात गांवों के विस्थापित बोले—’रोजी-रोटी की कीमत पर विकास मंजूर नहीं’

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल मित्रा 15 जुलाई 2026 सालानपुर/मैथन। मैथन डैम के जलाशय में प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर पावर परियोजना को लेकर क्षेत्र में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। परियोजना के खिलाफ अब सात गांवों के विस्थापित परिवार और स्थानीय ग्रामीण एकजुट होकर खुलकर मैदान में उतर आए हैं। लोगों का कहना है कि यदि यह परियोजना लागू हुई तो हजारों लोगों की आजीविका, मत्स्य पालन, नाव संचालन और पर्यटन से जुड़ा रोजगार प्रभावित होगा। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि उनकी सहमति के बिना जलाशय में सोलर प्लांट स्थापित नहीं होने दिया जाएगा। दामोदर वैली वास्तुहारा संग्राम समिति के नेतृत्व में कालीपत्थर फुटबॉल मैदान में एक विशाल जनसभा आयोजित की गई। इसमें बथानबाड़ी, कालीपत्थर, सिधाबाड़ी, डोमदोहा, वृंदाबनी समेत आसपास के सात गांवों के सैकड़ों लोग शामिल हुए। सभा में उपस्थित लोगों ने एकजुट होकर परियोजना का विरोध करने का संकल्प लिया और कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक प्रस्तावित योजना वापस नहीं ली जाती।सभा को संबोधित करते हुए समिति के चेयरमैन बासुदेव महतो ने कहा कि क्षेत्र के लोग विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास स्वीकार नहीं किया जा सकता जो स्थानीय लोगों के अस्तित्व और रोजगार पर संकट खड़ा कर दे। उन्होंने आरोप लगाया कि डीवीसी प्रबंधन वर्षों से विस्थापित परिवारों की समस्याओं की अनदेखी करता रहा है। उनका कहना था कि किसी भी नई परियोजना को लागू करने से पहले प्रभावित लोगों से चर्चा और उनकी सहमति लेना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।ग्रामीणों का कहना है कि मैथन जलाशय उनके जीवन का आधार है। यहां बड़ी संख्या में लोग नाव चलाकर, मछली पकड़कर और पर्यटन गतिविधियों से अपनी आजीविका चलाते हैं। यदि जलाशय के बड़े हिस्से में फ्लोटिंग सोलर पैनल लगाए गए तो नावों का संचालन प्रभावित होगा, मत्स्य पालन मुश्किल हो जाएगा और पर्यटन कारोबार भी ठप पड़ सकता है।स्थानीय ग्रामीण मुमताज अंसारी ने कहा कि पूरे क्षेत्र के अनेक परिवारों की आय सीधे तौर पर जलाशय से जुड़ी हुई है। वहीं काजल मंडल ने कहा कि डैम निर्माण के समय उनकी पैतृक जमीनें अधिग्रहित की गई थीं, लेकिन बदले में केवल आश्वासन मिले। अब यदि जलाशय पर भी प्रतिबंध लग गया तो लोगों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।बैठक के अंत में ग्रामीणों ने एक स्वर में घोषणा की कि वे अपने अधिकारों और रोजगार की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रखेंगे। अब सभी की नजर डीवीसी प्रबंधन और प्रशासन की आगामी रणनीति पर टिकी है कि वे इस बढ़ते जनविरोध के बीच क्या निर्णय लेते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *