न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल मित्रा 21 अगस्त सालानपुर। माइथन बांध पर प्रस्तावित 234 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना को लेकर शुक्रवार को एक बार फिर गतिरोध सामने आया। करीब 1200 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का डोमदहा, कालीपाथर, सिधाबाड़ी, लाधना, वृंदावनी और बाथानबाड़ी समेत 12 गांवों के विस्थापित परिवार विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों पहले किए गए वादे पूरे किए बिना नई परियोजना को आगे बढ़ने नहीं दिया जाएगा।रामचंद्रपुर कम्युनिटी हॉल में प्रशासन, डीवीसी और विस्थापित प्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय बैठक हुई। बैठक में डीवीसी के डीजीएम एडमिनिस्ट्रेशन सुखमय नायक, डीजीएम शैलेन्द्र कुमार, सीएसआर हेड, सालानपुर थाना प्रभारी विश्वजीत मंडल, कल्याणेश्वरी फांड़ी प्रभारी पार्थ सरकार और बीडीओ कार्यालय के प्रतिनिधि मौजूद रहे।विस्थापितों ने कहा कि माइथन बांध निर्माण के दौरान उनकी जमीन और घर जलमग्न हो गए थे। उस समय नौकरी, पेयजल, स्कूल और मुफ्त बिजली जैसी सुविधाओं का आश्वासन दिया गया था, लेकिन सात दशक बाद भी कई मांगें अधूरी हैं। ग्रामीणों ने मुफ्त बिजली और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग को परियोजना की स्वीकृति से जोड़ दिया है।डीवीसी के डीजीएम सुखमय नायक ने कहा कि ग्रामीणों की सभी मांगें दर्ज की गई हैं। मुफ्त बिजली पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सरकार की नीति से जुड़ा विषय है। वहीं स्थायी नौकरी देने में असमर्थता जताते हुए उन्होंने कहा कि एलएंडटी पावर के माध्यम से परियोजना में स्थानीय श्रमिकों को प्राथमिकता दी जाएगी। आईटीआई, डिप्लोमा और सोलर क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं को भी अवसर देने की बात कही गई।डीवीसी ने सीएसआर के तहत सड़क, स्ट्रीट लाइट, पेयजल और कम्युनिटी हॉल के विकास का भरोसा दिया। मोबाइल हेल्थ वैन की संख्या बढ़ाने और लेफ्ट बैंक स्कूल के जीर्णोद्धार की जानकारी भी दी।हालांकि बैठक बेनतीजा रही। डीजीएम ने कहा कि जरूरत पड़ने पर दोबारा वार्ता की जाएगी। ऐसे में राज्य की बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं में शामिल यह योजना फिलहाल अधर में लटक गई है।
माइथन में 1200 करोड़ की सौर परियोजना पर संकट, विस्थापितों ने कहा—पहले हक दो, फिर काम करो

