न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल मित्रा 15 जुलाई 2026 बराकर/कुल्टी। कुल्टी विधानसभा क्षेत्र के बराकर स्थित श्री श्री गौरांग मंदिर एवं मां अन्नपूर्णा भंडारा मंदिर में बुधवार को भगवान जगन्नाथ की विशेष स्नान यात्रा श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुई। करीब 102 वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा में पश्चिम बंगाल और झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। आसनसोल, दुर्गापुर, पुरुलिया, कोलकाता तथा झारखंड के सीमावर्ती इलाकों से आए भक्तों ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।मंदिर परिसर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भगवान जगन्नाथ का विशेष अभिषेक किया गया। पूरे आयोजन के दौरान वातावरण भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े दिखाई दिए।मंदिर के सेवायत हरे कृष्ण बाबा ने बताया कि इस मंदिर की परंपरा अन्य जगन्नाथ मंदिरों से कुछ अलग है। सामान्यतः स्नान यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ के मंदिर 15 दिनों के लिए बंद हो जाते हैं, लेकिन यहां महाप्रभु, राधा-कृष्ण, मां अन्नपूर्णा सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिदिन पूजा और भोग की परंपरा जारी रहती है। इसी कारण सीताराम बाबा के निर्देश पर वर्षों पहले इस विशेष स्नान यात्रा की शुरुआत की गई थी, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जा रहा है।उन्होंने बताया कि स्नान यात्रा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ का 120 प्रकार की पवित्र सामग्रियों से अभिषेक किया जाता है। इस अनुष्ठान में सात समुद्रों का जल, विभिन्न तीर्थस्थलों की पवित्र मिट्टी और जल के साथ पंचामृत एवं अन्य धार्मिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। विशेष स्नान के बाद भगवान को विधिवत रथ पर विराजमान कराया जाता है।हरे कृष्ण बाबा ने कहा कि इस वर्ष राज्य सरकार से प्राप्त आर्थिक सहयोग के कारण आयोजन को और अधिक व्यवस्थित एवं भव्य रूप दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से श्रद्धालुओं की सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया।श्रद्धालुओं का कहना था कि बराकर की यह अनूठी स्नान यात्रा अपनी प्राचीन परंपरा और धार्मिक महत्व के कारण पूरे क्षेत्र में विशेष पहचान रखती है। दूर-दराज से आने वाले भक्त इसे देखने और भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हर वर्ष उत्सुक रहते हैं। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्ति, उत्साह और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।
102 वर्षों की परंपरा का भव्य उत्सव: बराकर के गौरांग मंदिर में विशेष स्नान यात्रा, श्रद्धालुओं से गूंजा मंदिर परिसर
