न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 5 अक्टूबर चित्तरंजन। चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (CLW) में लंबे समय से अनुपयोगी पड़े स्टील फाउंड्री परिसर के बेहतर इस्तेमाल को लेकर नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेंन (NFIR) ने रेलवे बोर्ड के समक्ष महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। फेडरेशन ने बंद पड़े फाउंड्री परिसर को इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के पीरियॉडिकल ओवरहॉलिंग (POH), कंपोनेंट ओवरहॉल और तकनीकी उन्नयन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग की है।NFIR के महासचिव डॉ. एम. राघवैया ने 1 अक्टूबर 2026 को रेलवे बोर्ड के सदस्य (ट्रैक्शन एंड रोलिंग स्टॉक) को पत्र भेजकर इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया है। पत्र में बताया गया कि CLW की स्टील फाउंड्री वर्ष 1963 में स्थापित हुई थी और यहां रेलवे के लिए बोगी, बोल्स्टर, कपलर, स्ट्राइकर कास्टिंग, साइड फ्रेम, सेंटर पिवट सहित कई महत्वपूर्ण कलपुर्जों का निर्माण होता था। फाउंड्री को RDSO की क्लास-ए मान्यता भी प्राप्त थी।NFIR के अनुसार, 16 मार्च 2024 के आदेश के बाद फाउंड्री का उत्पादन बंद कर दिया गया और संयंत्र की मशीनरी भी हटा दी गई। हालांकि परिसर में बड़े औद्योगिक शेड, ओवरहेड क्रेन, रेलवे ट्रैक, सड़क, बिजली-पानी और अन्य आधारभूत सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे में इसे किसी दूसरे कार्य में लगाने के बजाय रेलवे से जुड़ी गतिविधियों में उपयोग करना अधिक उपयोगी होगा।फेडरेशन ने रेलवे बोर्ड से DPR तैयार कराने, तकनीकी एवं आर्थिक व्यवहार्यता का अध्ययन कराने तथा रेलवे बोर्ड, RDSO, CLW और किसी मौजूदा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव POH वर्कशॉप के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित करने की मांग की है। प्रस्ताव के तहत चरणबद्ध तरीके से आवश्यक मशीनरी, आधुनिक परीक्षण सुविधाएं और कर्मचारियों की व्यवस्था कर POH क्षमता बढ़ाने की बात कही गई है।NFIR का मानना है कि इससे रेलवे की आंतरिक क्षमता मजबूत होगी, बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता घटेगी और CLW की तकनीकी विशेषज्ञता का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।
बंद स्टील फाउंड्री को इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव POH सेंटर में बदलने की मांग, NFIR ने रेलवे बोर्ड को भेजा प्रस्ताव
